
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और पीएम मोदी। (Photo- ANI)
Boris Johnson statement on India, US and Britain: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव पश्चिमी देशों के लिए नई चुनौती बन गया है। दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे समय में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत की भूमिका को अहम बताया है। उन्होंने ईरान संकट और यूक्रेन युद्ध, दोनों पर नई दिल्ली से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है।
'इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम' में बोरिस जॉनसन ने कहा कि अमेरिका को ईरान के मामले में एक 'जाल' में फंसने से बचना चाहिए था। उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को 'गलती' बताया। उनके मुताबिक हवाई हमलों से ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना संभव नहीं है।
जॉनसन ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है। आतंकवाद को समर्थन देने से भी रोकना होगा। लेकिन ईरान में बदलाव भीतर से आना चाहिए। उन्होंने ईरान के साथ समझौते की जरूरत बताई। उनका कहना था कि भारत, अमेरिका और ब्रिटेन को मिलकर समाधान तलाशना चाहिए।
बोरिस जॉनसन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर भी जोर दिया। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि देशों को मिलकर तेल की कीमतें कम करने और जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए काम करना चाहिए।
अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाने के बावजूद जॉनसन ने उसे चीन से बेहतर वैश्विक शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों को अमेरिका को मौजूदा मुश्किल स्थिति से बाहर निकलने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सलाह लेने वाला नेता भी बताया। जॉनसन ने कहा कि ट्रंप अपने दोस्तों की राय सुनते हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं।
यूक्रेन युद्ध को लेकर जॉनसन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जीत की संभावना को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के लोगों की आजादी की इच्छा के सामने पुतिन की हार तय है। जॉनसन ने भारत से रूस पर ज्यादा दबाव बनाने की अपील की। उन्होंने रूस के प्रतिबंधित तेल के व्यापार को रोकने की बात कही। उन्होंने यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देने और ब्रसेल्स में रखी पुतिन की करीब 140 अरब डॉलर की संपत्ति हस्तांतरित करने का भी समर्थन किया।
जॉनसन ने भारत के रूस के साथ पुराने संबंधों को स्वीकार किया। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि मॉस्को पर दबाव बढ़ाए बिना युद्ध खत्म नहीं होगा। उन्होंने भारत-अमेरिका और भारत-ब्रिटेन के सैन्य सहयोग को भी मजबूत करने की वकालत की।
इस तरह जॉनसन की अपील में भारत की भूमिका दो मोर्चों पर दिखाई देती है। एक तरफ ईरान संकट में अमेरिका को रास्ता निकालने में मदद। दूसरी तरफ रूस पर दबाव बढ़ाकर यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश। यही वजह है कि पश्चिम अब भारत की कूटनीतिक ताकत को पहले से ज्यादा अहम मान रहा है।
Updated on:
23 Aug 2026 08:18 am
Published on:
23 Aug 2026 08:18 am
