
Veg Thali Price: घरेलू थाली की लागत में नवंबर के मुकाबले दिसंबर में मामूली राहत देखने को मिली है। क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स रिपोर्ट के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों में गिरावट, खासतौर पर टमाटर और प्याज की कीमतों में कमी ने वेज थाली को 3 प्रतिशत सस्ता कर दिया है। इसका मुख्य कारण मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से टमाटर की सप्लाई में बढ़ोतरी है। शादी और त्योहारों के मौसम में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से कीमतों में इजाफा हुआ।
जून से दिसंबर तक थाली की लागत के आँकड़ों पर नजर डालें:
—जून में वेज थाली की कीमत 29.4 रुपए और नॉन-वेज थाली 58 रुपए रही।
—जुलाई में वेज थाली 32.6 रुपए पर पहुंची, जबकि नॉन-वेज थाली 61.4 रुपए तक महंगी हुई।
—अगस्त और सितंबर में वेज थाली की कीमत 31.2 रुपए और 31.3 रुपए पर स्थिर रही, जबकि नॉन-वेज थाली 59.3 रुपए पर रही।
—अक्टूबर में थोड़ी राहत के बाद नवंबर में वेज थाली 32.7 रुपए और नॉन-वेज थाली 61.5 रुपए पर पहुंच गई।
—दिसंबर में वेज थाली की कीमत 31.6 रुपए और नॉन-वेज थाली 63.3 रुपए रही।
दिसंबर में प्याज की कीमतों में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टमाटर की कीमतों में भी 24 प्रतिशत तक कमी आई। हालांकि, ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने नॉन-वेज थाली को महंगा कर दिया।
कुछ खाद्य पदार्थ अभी भी महंगाई की मार झेल रहे हैं:
—आलू की कीमतों में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
—प्याज 33 प्रतिशत महंगा रहा।
—टमाटर की कीमतें 24 प्रतिशत बढ़ी थीं, लेकिन अब इनमें कमी आई है।
—चावल और दाल जैसे अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में तुलनात्मक स्थिरता है।
—खाद्य तेल की कीमतों में 16 प्रतिशत और चिकन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पर असर डाला है।
हालांकि, कुछ चीजों की कीमतों में गिरावट के बावजूद, थाली तैयार करने की लागत में स्थिरता अभी भी देखने को नहीं मिल रही है। महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार और व्यापारियों को आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उपायों पर जोर देना होगा।
दिसंबर में थाली की लागत में थोड़ी राहत मिली है, लेकिन आलू, प्याज और ब्रॉयलर जैसे खाद्य पदार्थों की महंगाई ने घरेलू बजट पर भारी असर डाला है। आगामी महीनों में कीमतों पर काबू पाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
रिपोर्ट में त्योहारों और शादी सीजन के कारण मांग में वृद्धि और चारे की ऊँची कीमतों को मांसाहारी थाली की कीमतों में वृद्धि का प्रमुख कारण बताया गया है। इसके विपरीत, आलू और प्याज की कीमतों में गिरावट ने शाकाहारी थाली को सस्ता बना दिया है। त्योहारों और शादी सीजन के दौरान मांसाहार की मांग में बढ़ोतरी हुई। चारे की ऊँची कीमतों ने भी पशु उत्पादों के दाम बढ़ाए, जिससे मांसाहारी थाली महंगी हो गई।
Updated on:
07 Jan 2025 11:57 am
Published on:
07 Jan 2025 10:12 am
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