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पश्चिम बंगाल में 65 चुनाव अधिकारी ही नहीं डाल पाएंगे वोट, जानें सुप्रीम कोर्ट से क्यों नहीं मिली राहत?

Supreme Court on SIR process: पश्चिम बंगाल में 65 चुनाव अधिकारियों के नाम मतदाता सूची से हटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार किया और अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख करने को कहा। जानें पूरा मामला और क्या हैं उनके अधिकार।

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सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: ANI)

Supreme Court on election officers voter list removal: पश्चिम बंगाल के लगभग 65 चुनाव ड्यूटी अधिकारियों के नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से उनके नाम हटा दिए गए हैं। ऐसे में इन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

अब इसको लेकर CJI सूर्यकांत, और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले SIR प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले विवादों से निपटने के लिए गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) से संपर्क करना चाहिए।

याचिका में तर्कः संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन

मोहम्मद तोहिदुल इस्लाम और अन्य द्वारा दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि याचिकाकर्ताओं के नाम, जिनमें से कई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए पीठासीन अधिकारी और प्रथम मतदान अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था, अंतिम मतदाता सूची से 'मनमाने ढंग से और गलती से' हटा दिए गए थे। इससे अनुच्छेद 326 के तहत मतदान करने के उनके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।

याचिका के मुताबिक, प्रभावित अधिकारियों को औपचारिक रूप से 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के तहत चुनाव ड्यूटी पर तैनात किया गया था। वे 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 18 A के तहत डाक मतपत्रों (postal ballots) के माध्यम से अपना वोट डालने के हकदार थे।

इन दलीलों के बावजूद, शीर्ष अदालत ने अपने रिट क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने से इनकार कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं को पहले अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क करना चाहिए, जिन्हें मतदाता सूची के SIR से उत्पन्न होने वाले मामलों का निर्णय करने के लिए पहले ही स्थापित किया जा चुका है। CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए कहा, 'ये तर्क अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष रखें। न्यायाधिकरण को इस मामले को देखने दें।'

सुप्रीम कोर्ट ने किया था स्पष्ट

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि संशोधित मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्ति केवल तभी मतदान करने के हकदार होंगे, यदि अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी अपीलें स्वीकार कर ली जाती हैं; केवल अपीलों के लंबित होने से मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

शीर्ष अदालत ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को यह भी निर्देश दिया था कि वह मतदान से पहले पूरक मतदाता सूची जारी करके न्यायाधिकरण के आदेशों को लागू करें। यह मामला पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी याचिकाओं के एक बड़े समूह का हिस्सा है, जिसमें मतदान का पहला चरण 23 अप्रैल को पहले ही संपन्न हो चुका है और दूसरा चरण 29 अप्रैल को निर्धारित है।