
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo- IANS/BJP)
Bengal elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, राज्य में सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी घुसपैठ, जनसांख्यिकीय बदलाव और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर मैदान में उतरी है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ममता बनर्जी के नेतृत्व में चौथी बार सत्ता पर काबिज होने के लिए SIR, वोटर लिस्ट जैसे तमाम मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेर रही है। हालांकि, इस बार असली जंग केवल नारों या रैलियों की नहीं, बल्कि महिला मतदाताओं के भरोसे की है। सत्ता पर काबिज टीएमसी और चुनौती पेश कर रही भाजपा के बीच मुकाबला अब सीधे तौर पर महिला केंद्रित मुद्दों पर सिमटता नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC ने महिला वोट बैंक को साधने के लिए अपनी लोक-कल्याणकारी योजनाओं को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। 'लक्ष्मी भंडार' और 'कन्याश्री' जैसी योजनाओं के जरिए पार्टी महिलाओं तक आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का सीधा संदेश पहुंचा रही है। ग्रामीण इलाकों में इन योजनाओं का व्यापक असर दिखाई देता है, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं इनका लाभ ले रही हैं। इन योजनाओं ने तृणमूल कांग्रेस के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है, जिसे भेदना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ममता सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' योजना के तहत 25 से 60 वर्ष की महिलाओं को सीधे बैंक खाते में आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) परिवारों को ₹1,200 तथा सामान्य वर्ग की महिलाओं को ₹1,000 प्रति माह प्रदान किए जाते हैं। इसके साथ ही 'कन्याश्री प्रकल्प' के माध्यम से 13-18 वर्ष की छात्राओं को शिक्षा जारी रखने के लिए 750 रुपए वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाती है और 18 वर्ष की आयु तक विवाह स्थगित करने पर एकमुश्त ₹25,000 की सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त, 'रूपश्री' योजना के तहत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए ₹25,000 दिए जाते हैं, जबकि 'स्वास्थ्य साथी' बीमा योजना परिवार की महिला मुखिया के नाम पर प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज सुनिश्चित करती है।
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं, जिसे देखते हुए भाजपा ने मुकाबले को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। भाजपा का आरोप है कि वर्तमान सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। भाजपा राज्य में सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने के वादे के साथ मैदान में है। इसके साथ ही, पार्टी केंद्र सरकार की 'उज्ज्वला' और 'आवास योजना' को महिला सशक्तिकरण के उदाहरण के रूप में पेश कर रही है, ताकि टीएमसी के दुर्ग में सेंध लगाई जा सके।
टीएमसी की योजनाओं के जवाब में भाजपा ने 'मातृशक्ति भरोसा कार्ड' लॉन्च किया है। पार्टी ने वादा किया है कि सरकार बनने पर राज्य की महिलाओं को प्रति माह ₹3,000 यानी सालाना ₹36,000 दिए जाएंगे। इस योजना को ममता बनर्जी की 'लक्ष्मी भंडार' योजना के काट के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, भाजपा ने गर्भवती महिलाओं को ₹21,000 की वित्तीय सहायता और बेटियों की शिक्षा के लिए ₹50,000 की अतिरिक्त मदद देने जैसे लोक-लुभावन वादे भी किए हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
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Updated on:
19 Apr 2026, 3:40 PM IST
Published on:
19 Apr 2026, 3:40 PM IST
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