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नेता प्रतिपक्ष को लेकर TMC और सचिवालय आमने-सामने, जानें क्या है मामला

Leader of Opposition: TMC और सचिवालय के बीच नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाले पत्र को सचिवालय ने खारिज कर दिया।
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कोलकाता

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Devika Chatraj

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Updated: 19 May 2026, 12:38 PM IST

Leader of Opposition in Bengal

नेता प्रतिपक्ष को लेकर TMC और सचिवालय आमने-सामने (X)

West Bengal Assembly: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा सचिवालय और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच इस मुद्दे पर टकराव की स्थिति बन गई है। मामला अब सिर्फ राजनीतिक सहमति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नियमों और प्रक्रिया की वैधता तक पहुंच गया है। टीएमसी विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय ने इस पूरे मामले में सूचना के अधिकार (RTI) का सहारा लिया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।

अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र खारिज

सूत्रों के मुताबिक, TMC की ओर से सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र विधानसभा सचिवालय को भेजा गया था। इस पत्र में सोहनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। हालांकि, विधानसभा सचिवालय ने इस पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सचिवालय का कहना है कि इस तरह की नियुक्ति के लिए कम से कम 80 विधायकों के समर्थन वाला औपचारिक पत्र जरुरी है।

RTI दाखिल कर नियमों पर उठाए सवाल

बालीगंज से विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय ने RTI दाखिल करते हुए पूछा है कि वर्ष 2011, 2016 और 2021 में नेता प्रतिपक्ष चुनने की प्रक्रिया में किन नियमों का पालन किया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि वर्तमान प्रक्रिया में अलग मानक क्यों अपनाए जा रहे हैं और पारदर्शिता की कमी क्यों दिखाई दे रही है।

दफ्तर पर ताला लगे की बात आई सामने

रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा में विपक्ष के नेता के कार्यालय पर ताला लगे होने की बात भी सामने आई है। चट्टोपाध्याय का कहना है कि सामान्य तौर पर नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि विधानसभा सचिवालय सीधे मान्यता देता है। लेकिन इस बार स्थिति असामान्य बनी हुई है, जिससे राजनीतिक असमंजस बढ़ गया है।

विधानसभा सचिवालय की सख्त प्रतिक्रिया

विधानसभा के ट्रेजरी बेंच से जुड़े एक सदस्य ने कहा कि किसी बाहरी नेता के हस्ताक्षर इस प्रक्रिया में मान्य नहीं हो सकते। उनका इशारा सीधे अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर था, जिन्होंने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। वहीं, कुछ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता का चयन विधायकों की आंतरिक बैठक और औपचारिक सहमति के आधार पर ही होना चाहिए।

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