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बैंक या सरकार… जानें किसे मिलेंगे कांग्रेस सांसद धीरज साहू के ठिकानों से बरामद हुए 353 करोड़

आयकर विभाग ने कांग्रेस सांसद धीरज प्रसाद साहू और उनके करीबियों के यहां छापेमारी में 353 करोड़ कैश जब्त किए। अब इस कैश के साथ एजेंसी क्या करेगी आइये जानते हैं...

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झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू और उनके करीबियों के ठिकानों से आयकर विभाग ने भारी मात्रा में कैश बरामद किया है। इसके ठिकानों से आयकर विभाग की टीम ने कैश से भरे 176 बैग बरामद किया। इन नोटों को गिनने में 40 मशीनें लगी थी। तीन बैंक के 80 कर्मियों पांच दिनों तक दर्जनों सुरक्षाकर्मियों के बीच यहां नोट गिनते रहें। धीरज साहू के ठिकानों से इतना पैसा निकला की इतिहास बन गया। एक ऑपरेशन में आज तक कभी भी एक साथ इतने कैश नहीं मिले थे। 10 दिसंबर, रविवार की रात नोटों की गिनती पूरी हुई। ऐसे में एक सवाल जो बहुत लोगों के मन में उठ रहा है कि अब इन पैसों का होगा क्या?


6 दिसंबर को शुरू हुई थी रेड

बुधवार 6 दिसंबर को आयकर विभाग की कई टीमों ने धीरज साहू से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू की थी। यह रेड झारखंड, ओडिशा और बंगाल में मारा गया। छापेमारी के बाद जब कैश से भरे अलमारियों का वीडियो सामने आया तो लोग दंग रहे गए। यह रेड लगभग 5 दिनों तक चली, जिसमें आयकर विभाग की टीम ने कैश से भरे कई लॉकर बरामद किए जिसे बाद में 176 बैगों में भरा गया।

बैंक का क्या रोल

जब भी एजेंसी किसी रेड में नकदी जब्त करती है वैसे ही नजदीकी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई को इसकी जानकारी दी जाती है। तुरंत वहां से स्टाफ बुलाए जाते हैं। फिर नोटों की गिनती शुरू की जाती है। कांग्रेस सांसद धीरज साहू के मामले में तीन बैंक के स्टाफ बुलाए गए थे। 40 मशीन लगातार नोट गिनते-गिनते हांफने लगे थे। नोटों को गिनने में पांच दिन लगा। बैंक कर्मी फिर इन नोटों को गिनती हैं और उसका बंडल बनाया जाता है।

पैसों को यहां लाया जाता है

बैंक कर्मी नोटों की गिनती के बाद इसे बक्सों में रखते हैं। सुरक्षा के लिए एहतियातन उन्हें सील कर दिया जाता है और उन्हें एसबीआई में पहुंचाया जाता है। फिर बैंक इसे एजेंसी के खाते में जमा कर देती है। धीरज साहू के केस में आयकर विभाग ने जो 353 करोड़ रुपए कैश बरामद किए हैं उन्हें एजेंसी के पर्सनल डिपॉजिट खाते में जमा किए जाएगा। फिर इन पैसों को सरकार के खजाने में भेज दिए जाते हैं। लेकिन अभी सरकार को इन पैसों को इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा।

अंतिम प्रक्रिया क्या है?

झारखंड से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस एमपी धीरज साहू के केस में बरामद हुए 353 करोड़ रुपए पहले एसबीआई में जमा किया जाएगा, फिर अदालत में जब तक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं होगी तब तक यह पैसे बैंक में रहेगा। सुनवाई के दौरान अगर कोर्ट आरोपी को दोषी ठहराता है तब यह पैसे सरकार के खजाने में भेज दिए जाएंगे और तब जाकर इसका उपयोग किया जा सकेगा। अगर कहीं कोर्ट आरोपी को बरी कर देता है तो सारे पैसे उसे वापस मिल जाएंगे।