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NCERT की किताबों में क्या छपेगा और क्या नहीं? जानें कौन करता है फैसला

आपने कभी न कभी NCERT की किताब जरूर देखी होगी लेकिन क्या आपको पता है की NCERT की किताबों में लिखा जाने वाला कंटेंट कैसे डिसाइड होता है और कौन इसका फैसला करता है।

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भारत

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Devika Chatraj

Feb 26, 2026

NCERT Books

NCERT की किताबों में क्या छपेगा और क्या नहीं, यह फैसला एक व्यवस्थित प्रक्रिया से होता है। एनसीईआरटी (National Council of Educational Research and Training) खुद किताबें तैयार नहीं करता, बल्कि इसमें टॉप एक्सपर्ट्स, प्रोफेसर, स्कॉलर्स, रिसर्चर्स और टीचर्स की कमेटियां (जैसे टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी या TDC) काम करती हैं। पहले नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के आधार पर क्या पढ़ाना है, इसका ढांचा बनता है, फिर विषय विशेषज्ञ चैप्टर लिखते और रिव्यू करते हैं। कई स्तरों पर जांच के बाद नेशनल सिलेबस एंड ट्रेनिंग लर्निंग मटेरियल कमेटी (NSTC) या गवर्निंग बॉडी आखिरी मंजूरी देती है

किताबें कैसे बनती हैं और फैसला कौन करता है?

  • यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और सब्जेक्ट एक्सपर्ट
  • स्कूल टीचर
  • शिक्षाशास्त्र (पेडागॉजी) के विशेषज्ञ
  • NCERT के कुछ फैकल्टी मेंबर
  • कभी-कभी हाई-लेवल नेशनल पैनल भी (जैसे NEP के तहत कस्तूरीरंगन कमेटी या हाल की 19 सदस्य वाली कमेटी जिसमें सुधा मूर्ति, शंकर महादेवन जैसे लोग थे) ये कमेटी मिलकर चैप्टर लिखती है, फैक्ट चेक करती है और किताब तैयार करती है।

अप्रूवल और फाइनल डिसीजन

कमेटी की सिफारिश के बाद NCERT की एडिटोरियल टीम और डायरेक्टर देखते हैं। आखिरी फैसला NCERT के ऊपर होता है, लेकिन ये शिक्षा मंत्रालय के गाइडलाइन और National Curriculum Framework (NCF) के हिसाब से चलता है।

बड़े बदलाव या रिवीजन

जब नई पॉलिसी आती है (जैसे NEP 2020), तो अलग से हाई-लेवल कमेटी बनती है। किताबों में क्या रखना है या क्या हटाना है, ये रेशनलाइजेशन के नाम पर होता है जैसे पुराना कंटेंट ओवरलैप हो, मुश्किल हो या आज के समय में जरूरी न हो।

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