
सम्राट चौधरी और राबड़ी देवी। (फोटो- IANS)
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा पन्ना पलटा है। सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार में सीएम पद के लिए उनके नाम का ऐलान किया। लेकिन इस ताजपोशी तक पहुंचने की कहानी उतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है।
सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary News) बिहार के दूसरे ऐसे नेता हैं जो पहले डिप्टी सीएम रहे और उसके बाद सीएम बने। बिहार में कर्पूरी ठाकुर अब तक एकमात्र ऐसे नेता थे जो पहले डिप्टी सीएम रहे और बाद में मुख्यमंत्री बने।
सम्राट चौधरी संभवतः पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो मंत्रिमंडल से बर्खास्त होने के बाद इस ऊंचाई तक पहुंचे। जब बिहार में राबड़ी देवी की सरकार थी, तब सम्राट को मंत्री पद से बर्खास्त किया गया था।
राबड़ी मंत्रिमंडल में जब यह बात सामने आई कि मंत्री बनने के वक्त सम्राट की उम्र कम थी यानी वो नाबालिग थे, तब उनके खिलाफ फर्जी जानकारी देने का मामला भी दर्ज हुआ था। इस प्रकरण के बाद राबड़ी सरकार में उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया।
विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि 20 साल से वो राजनीति में सक्रिय हैं लेकिन पहले कोई विचारधारा नहीं थी। फिर उन्हें भाजपा के साथ जुड़ने का अवसर मिला और तब से पार्टी ने जब जो दायित्व दिया, उसे उन्होंने जिम्मेदारी के साथ निभाया।
सीएम पद की घोषणा के बाद उन्होंने कहा कि वो नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रभावित होकर भाजपा से जुड़े। पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री जैसे अहम पदों पर काम करने का मौका दिया।
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने समृद्धि यात्रा के दौरान कई सभाओं में सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर उनसे जनता का अभिवादन इस तरह करवाया, जैसे नीतीश यह बता रहे हों कि उनके बाद सम्राट ही उनकी जगह लेंगे। राजनीतिक गलियारों में यह इशारा किसी से छिपा नहीं था।
राजद से अलग हुए तेज प्रताप यादव ने प्रेसवार्ता में कहा- अगर वह मुख्यमंत्री बनते हैं तो ठीक है, उन्हें मेरा समर्थन रहेगा। विपक्ष की तरफ से किसी संभावित सीएम के लिए इस तरह का बयान बिहार की राजनीति में बड़ी बात है।
Published on:
14 Apr 2026 05:45 pm
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