
संसद में बुधवार को बड़े पैमाने पर सुरक्षा उल्लंघन देखा गया जब दो घुसपैठिए लोकसभा कक्ष में कूद गए और पीले धुएं के डिब्बे फोड़ दिए। वहीं दो अन्य ने संदन की नई इमारत के बाहर प्रदर्शन करते हुए स्मोक बम छोड़े। सुरक्षा उल्लंघन के छह आरोपियों में से चार पर गुरुवार को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाया गया था। उनमें से एक ललित झा है। घटना के कथित मास्टरमाइंड ललित झा ने कल दिल्ली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। संसद में धुआं निकलने की घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया। आइए जानते हैं मास्टरमाइंड ललित झा के बारे में और संसद में सेंधमारी के पीछे मकसद क्या था।
कौन हैं ललित झा?
घटना के बाद से ललित झा फरार था। आरोपी बिहार का रहने वाला है लेकिन कोलकाता के बड़ाबाजार इलाके में शिक्षक के पद पर कार्यरत था। आरोपियों पर आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
शहीद भगत सिंह से प्रेरित है झा
ललित झा पहले पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आदिवासी शिक्षा पर काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन, समयाबादी सुभाष सभा समूह के इकाई अध्यक्ष थे। वह समूह के विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय थे। झा स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह से प्रेरित है।
शांत स्वभाव के व्यक्ति है मास्टरमाइंड
ललित झा शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, वह स्थानीय छात्रों को पढ़ाते थे। पड़ोस में एक चाय की दुकान के मालिक ने बताया कि कुछ साल पहले वह कोलकाता के बड़ाबाजार में अकेले आए थे। उन्होंने दो साल पहले अचानक क्षेत्र छोड़ दिया।
एनजीओ को भेजा घटना का वीडियो
पुलिस ने कहा कि झा ने कथित तौर पर संसद के बाहर धुएं के डिब्बे तैनात करने वाले आरोपियों के वीडियो शूट किए। मीडिया कवरेज सुनिश्चित करने के लिए वीडियो को एक एनजीओ संस्थापक को सौंप दिया। कथित मास्टरमाइंड नीलाक्ष आइच द्वारा संचालित एक एनजीओ का महासचिव था। उन्होंने संस्थापक को यह सुनिश्चित करने के लिए घटना के वीडियो भेजे थे कि वे सुरक्षित हैं।
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नीलम और अमोल को नहीं मिला था पास
सुरक्षा उल्लंघन के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से दो व्यक्ति- सागर और मनोरंजन ने स्मोक बमों की तस्करी की और लोकसभा की कार्यवाही के दौरान छोड़ा। वहीं दो अन्य नीलम देवी और अमोल शिंदे को पास नहीं मिल सका। इन दोनों ने पकड़े जाने से पहले संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, नारे लगाए और धुएं के डिब्बे लहराए। सूत्रों ने बताया कि पांचों आरोपियों ने पुलिस को बताया है कि वे बेरोजगारी, किसानों की परेशानी और मणिपुर हिंसा जैसे मुद्दों से परेशान थे। सभी आरोपियों की विचारधारा एक थी और इसलिए उन लोगों ने सरकार को संदेश देने का फैसला किया था।
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Published on:
15 Dec 2023 10:18 am
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