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CJP Protest: कौन है रुचिका सिंह? जिसने सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का किया था इस्तेमाल

Ruchika Singh FIR: सोशल मीडिया प्रोफाइल और स्थानीय जानकारी के अनुसार, रुचिका सिंह नोएडा की रहने वाली हैं। वह एक सैलून में काम करती है।
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भारत

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Ashib Khan

Jul 31, 2026

Ruchika Singh FIR

रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर हुई दर्ज (Photo-X @PrasantGopinat)

Who Is Ruchika Singh: नीट पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ था। इस प्रदर्शन की कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। एक वीडियो रुचिका सिंह की भी वायरल हुई थी, जिसमें वह पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए नजर आ रही है। पुलिस ने इस मामले में जीरो एफआईआर भी दर्ज की है। यह मामला 23 जुलाई को आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है।

इस मामले में पुलिस ने बताया कि गाजियाबाद निवासी अधिवक्ता की शिकायत पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। चूंकि कथित घटना दिल्ली में हुई थी, इसलिए आगे की जांच के लिए मामला दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित किया जाएगा।

कौन हैं रुचिका सिंह?

सोशल मीडिया प्रोफाइल और स्थानीय जानकारी के अनुसार, रुचिका सिंह नोएडा की रहने वाली हैं। वह एक सैलून में काम करती है। सोशल मीडिया पर लोग रुचिका सिंह पर लोग अपनी भड़ास निकाल रहे है। रुचिका सिंह पर धारा- 352, 353 (1) और 356 (1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

कौन है शिकायकर्ता? 

बता दें कि नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में अधिवक्ता स्मृति सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है। स्मृति सिंह गाजियाबाद के वसुंधरा में रहने वाली हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रुचिका सिंह ने प्रदर्शन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में कहा गया है कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना, सार्वजनिक शांति भंग करना और संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाना था।

क्या होती है Zero FIR?

Zero FIR ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, चाहे घटना किसी अन्य क्षेत्र में ही क्यों न हुई हो। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित क्षेत्राधिकार वाले पुलिस थाने को मामला जांच के लिए भेज दिया जाता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकार क्षेत्र की वजह से शिकायत दर्ज करने में देरी न हो। सुप्रीम कोर्ट और गृह मंत्रालय भी समय पर शिकायत दर्ज करने के महत्व पर जोर दे चुके हैं।