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11 साल बाद आया बड़ा फैसला! हाई कोर्ट ने 4 कैदियों की उम्रकैद की सजा को क्यों किया रद्द? जानें पूरी वजह

जुलाई 2013 में गुंटूर जिले के जंगल क्षेत्र में बकरी चरवाहे बिल्ला मौलाली का शव मिला था। अभियोजन का आरोप था कि पांच आरोपियों ने सामान्य इरादे से उसकी हत्या की और उसके परिवार की 20 बकरियां चुराईं।
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हैदराबाद

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Shaitan Prajapat

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Updated: 7 Jan 2026, 6:13 PM IST

court news

प्रतीकात्मक फोटो

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 2013 में गुंटूर जिले के एक बकरी चरवाहे की हत्या और चोरी के मामले में चार दोषियों की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी। जस्टिस के सुरेश रेड्डी और सुब्बा रेड्डी सत्ती की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य सबूतों की पूरी श्रृंखला स्थापित करने में असफल रहा। इस फैसले से तीन आरोपी पूरी तरह बरी हो गए, जबकि चौथे की हत्या और चोरी की सजा रद्द हुई, लेकिन चोरी की संपत्ति रखने की सजा बरकरार रही।

जानें क्या है पूरा मामला

जुलाई 2013 में गुंटूर जिले के जंगल क्षेत्र में बकरी चरवाहे बिल्ला मौलाली का शव मिला था। अभियोजन का आरोप था कि पांच आरोपियों ने सामान्य इरादे से उसकी हत्या की और उसके परिवार की 20 बकरियां चुराईं। कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, इसलिए मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य सबूतों पर टिका था। 2018 में सेशंस कोर्ट ने चार आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 379 (चोरी) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। एक आरोपी को अतिरिक्त धारा 411 (चोरी की संपत्ति रखना) के तहत भी दोषी ठहराया गया।

हाई कोर्ट की दलीलें

कोर्ट ने पाया कि चेन ऑफ सरकमस्टैंसियल एविडेंस पूरी नहीं हुई। कई महत्वपूर्ण गवाह दुश्मन हो गए और अभियोजन का समर्थन नहीं किया। 'लास्ट सीन थ्योरी' साबित नहीं हुई। एकमात्र ठोस सबूत एक आरोपी के घर से घटना के तीन महीने बाद 20 बकरियों की बरामदगी था, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त माना। कोर्ट ने कहा, "चोरी की बकरियों को महीनों तक रखना अविश्वसनीय है, क्योंकि चोर उन्हें जल्दी बेच देते।"

फैसले के मुख्य अंश

जजों ने कहा कि अभियोजन ने आरोपियों को धारा 302 और 379 से जोड़ने के लिए कोई सामग्री नहीं रखी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल चोरी की संपत्ति की देर से बरामदगी पर हत्या या चोरी की सजा नहीं टिकी सकती। तीन आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, जबकि चौथे की हत्या-चोरी की सजा रद्द हुई। कोर्ट ने उन्हें तुरंत रिहा करने और जुर्माना वापस करने का आदेश दिया, अगर वे किसी अन्य मामले में वांछित न हों।