1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पति को सार्वजनिक रूप से औरतबाज कहना अत्यधिक क्रूरता, हाईकोर्ट बोला- तलाक का बनता है आधार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी व्यक्ति को उसके कार्यालय में झूठे आरोपों के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानित करना अत्यधिक क्रूरता का काम है। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के कामों को अत्यधिक क्रूरता का आधार तलाक लिया जा सकता है।

2 min read
Google source verification
divorce55_1.jpg

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को उसके कार्यालय में झूठे आरोपों के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानित करना और उसे "महिलावादी" करार देना उसके प्रति अत्यधिक क्रूरता का कार्य है। हाईकोर्ट ने पत्नी के इस प्रकार की हरकतों को अत्यधिक क्रूरता का आधार बताते हुए एक विवाहित जोड़े को दिए गए तलाक को बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने विवाह के मूलभूत स्तंभों के रूप में विश्वास, आस्था और सम्मान के महत्व पर जोर दिया।


बदनाम, अपमानजनक और निराधार आरोपों से खराब हुई छवि

खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने जीवनसाथी से इस तरह के अपमानजनक आचरण को सहन करने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए, जरूरत के समय में उनकी छवि और प्रतिष्ठा के रक्षक के रूप में काम करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि एक पति या पत्नी द्वारा लगाए गए लापरवाह, बदनाम करने वाला, अपमानजनक और निराधार आरोपों से दूसरे की छवि खराब हुई और यह अत्यधिक क्रूरता के काम के समान है।

पति को अपमानित करना अत्यधिक क्रूरता

कोर्ट ने कहा कि दुर्भाग्य से एक ऐसा मामला है जहां पति को उसकी पत्नी द्वारा सार्वजनिक रूप से परेशान, अपमानित और मौखिक रूप से हमला किया जा रहा है, जो अपने कार्यालय की बैठकों के दौरान अपने सभी कार्यालय कर्मचारियों/मेहमानों के सामने बेवफाई के आरोप लगाने थे। कोर्ट में कहा गया कि उसने अपने कार्यालय की महिला कर्मियों को भी परेशान करना शुरू कर दिया और कार्यालय में उसे एक महिलावादी करार दिया गया। यह व्यवहार पति के प्रति अत्यधिक क्रूरता का कार्य है।

यह भी पढ़ें- फोन टैपिंग-ट्रेकिंग सूचना आरटीआई दायरे में है या नहीं, जानिए हाईकोर्ट का फैसला

छह महीने पहले हुई थी शादी

उच्च न्यायालय ने पारिवारिक अदालत के आदेश के खिलाफ पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने पति द्वारा दायर अपील में क्रूरता के आधार पर तलाक की मंजूरी दे दी थी। इस जोड़े ने छह महीने पहले शादी की थी। कोर्ट ने कहा कि कोई भी सफल शादी आपसी सम्मान और विश्वास पर टिकी होती है। यदि किसी एक स्तर से समझौता किया जाता है, तो रिश्ते का अंत निश्चित है क्योंकि कोई भी रिश्ता आधे सच, आधे झूठ, आधे सम्मान और आधे विश्वास पर टिक नहीं सकता है।

यह भी पढ़ें- नए साल में अगर अमीर बनने का ले रहे संकल्प तो यहां समझिए धन बढ़ाने के 8 गोल्डन रूल्स

यह भी पढ़ें- हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कैदियों को संतानोत्पत्ति और माता-पिता बनने का मौलिक अधिकार