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स्कूल भवन की दीवार में पड़ी दरार, जर्जर कक्ष में बैठ पढऩे को मजबूर मासूम बचपन

जर्जर भवनों में पढऩे को मजबूर नौनिहाल, हादसे का बढ़ता खतरा, जरा से बारिश में स्कूल परिसर बन जाता है तालाब
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नीमच

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Mukesh Sharaiya

Jul 10, 2026

Neemuch Breaking News

प्राथमिक विद्यालय अयोध्या बस्ती की जर्जर दीवार।

नीमच. शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि शिक्षक के आचरण, समर्पण और विद्यालय के वातावरण से भी बच्चों का भविष्य संवरता है। इन दिनों जहां कुछ महिला शिक्षिकाओं के विद्यालय परिसर में सोशल मीडिया रील्स बनाने के वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर नीमच में ऐसे शिक्षक भी हैं जो अपने निजी खर्चे से स्कूल की रंगाई-पुताई कर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में जुटे हैं।

शहर के कई शासकीय विद्यालय आज भी जर्जर और खंडहरनुमा
यह तस्वीर शिक्षा व्यवस्था के दो विपरीत पहलुओं को सामने लाती है। एक ओर शिक्षक बच्चों को विद्यालय से जोडऩे के लिए अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक सोशल मीडिया पर लाइक, व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में अपनी जिम्मेदारियों से भटकते नजर आए। इसके साथ ही शहर के कई शासकीय विद्यालय आज भी जर्जर और खंडहरनुमा भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां बरसात के मौसम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बरसात के दौरान शहर के कई शासकीय विद्यालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। वीर पार्क रोड स्थित शासकीय एकीकृत विद्यालय क्रमांक-2, नीमच कैंट में कई कक्ष पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। भवन की दीवारों में दरारें आ गई हैं, छतों का प्लास्टर झड़ रहा है और बारिश के समय कमरों में पानी टपकता है। विद्यालय परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी प्रकार शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 (एक शाला-एक परिसर) में भी हालात चिंताजनक हैं। परिसर में संचालित सिंधी शाला सहित अन्य विद्यालयों के कई कमरों की छतें क्षतिग्रस्त हैं। प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। बरसात में पानी भर जाता है। इतना ही नहीं, जिस कक्ष में बच्चे मध्यान्ह भोजन करते हैं, वह भी जर्जर अवस्था में है। स्टाफ रूम की छत भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा कई बार विभाग को लिखित रूप से भवनों की मरम्मत कराने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

शिक्षक ने व्यक्तिगत खर्च पर कराई रंगाई-पुताई
वहीं अयोध्या बस्ती स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर प्रेरणादायक भी है और चिंताजनक भी। यहां के शिक्षक सईद खान ने सरकारी बजट का इंतजार करने के बजाय अपने निजी खर्चे से विद्यालय की रंगाई-पुताई कराई, ताकि बच्चों को स्वच्छ, आकर्षक और प्रेरणादायक वातावरण मिल सके। उनका कहना है कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों में नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास करने का केंद्र होता है। यदि विद्यालय सुंदर और साफ.सुथरा होगा तो बच्चों का मन भी पढ़ाई में अधिक लगेगा। हालांकि इस विद्यालय के सामने एक और गंभीर समस्या है। विद्यालय परिसर शाम चार बजे के बाद असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। निजी खर्चे से कराई गई रंगाई-पुताई के बावजूद भवन की दीवारों पर अभ्रद भाषा लिखकर और आपत्तिजनक चित्र बना दिए जाते हैं। परिसर में कचरा फैलाया जाता है तथा शराब की खाली बोतलें छोड़ दी जाती हैं, जिनसे बच्चों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। विद्यालय स्टाफ ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि स्कूल शुरू होने के समय से लेकर विद्यालय बंद होने के बाद देर रात तक नियमित पुलिस गश्त कराई जाए, ताकि असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

इनका कहना है
जिला शिक्षा अधिकारी ऐश्वर्या मूंदड़ा ने बताया कि जर्जर भवनों एवं अन्य आधारभूत समस्याओं की शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विद्यालयों का निरीक्षण कराया जाएगा। जहां आवश्यकता होगी, वहां मरम्मत एवं सुधार कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा।