
इस तरह खुले में उड़ती धूल-मिट्टी के बीच बिकती है खाद्य सामग्री।
मुकेश सहारिया, नीमच. खाद्य एवं औषधि विभाग में न बाबू हैं और न ही चपरासी। १३ स्वीकृत पदों में से मात्र एक अधिकारी यहां पदस्थ हैं। उन्हें ही व्यापारियों की समस्याएं सुनना हैं और मिलावटखोरों की नकेल भी कसना है। खाद्य एवं औषधि विभाग स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है तो मिलावटखोर मनमानी कर रहे हैं। शहर में मिथ्याछाप और अमानक स्तर की खाद्य सामग्री की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है और विभाग लाचार है।
स्टॉफ की कमी से जूझ रहा विभाग
खाद्य एवं औषधि विभाग में वर्षों से अधिकारियों-कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। यहां किसी समय पर्याप्त स्टॉफ था। समय के साथ अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले होते गए और पद भी रिक्त होते गए। आज हालात यह बन गए हैं कि खाद्य एवं औषधि विभाग में १३ पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्य एक ही अधिकारी कर रहा है। एक ही अधिकारी को लोगों की समस्याएं भी सुनना है तो विभागीय पत्रों के जवाब भी भेजना है। नियमानुसार प्रतिमाह निर्धारित संख्या में नमूनों की सेम्पलिंग भी करना है तो जांच में अमानक/मिथ्या छाप पाए जाने वाले दुकानदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई को भी अंजाम देना है। स्टॉफ की कमी से खाद्य एवं औषधि विभाग जूझ रहा है और इसका लाभ मिलावटखोर उठा रहे हैं। खुलेआम मिथ्याछाप और अमानक स्तर की खाद्य सामग्री लोगों को बेची जा रही है।
आंकड़ों पर एक नजर (एक जनवरी से २८ नवंबर तक)
लिए गए कुल सेम्पल-५५
प्राप्त हुई कुल रिपोर्ट-४६
अमानक व मिथ्या छाप-१०
रिपोर्ट जो जांच में है-९
जिले में कुल रजिस्टर्ड/लाइसेंस-५८०३
स्टॉफ की कमी से जूझ रहा विभाग
खाद्य सुरक्षा अधिकारी स्वीकृत-३
पदस्थ-१
रिक्त-२
नमूना सहायक स्वीकृत-३
रिक्त-३
बाबू-रिक्त
चपरासी-रिक्त
अभिहित अधिकारी-रिक्त
जिले में मिलावटखोरों के हौंसले बुलंद
मिलावटखोर जिले की जनता को खुलेआम लूट रहे हैं। आकर्षक पैकिंग की आड़ में मिलावटी सामग्री लोगों को बेची जा रही है। क्या दूध और क्या खाने का तेल सभी में मिलावट की जा रही है। स्टॉफ की कमी के चलते विभाग भी ऐसे मिलावटखोरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। स्टॉफ की कमी का ही परिणाम है कि एक साल में (११ माह में) मात्र ५५ की सेम्पल लिए जा सके। इसमें में भी ४६ रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हुई। इसमें भी मात्र १० ही में मिथ्याछाव व अमानक स्तर की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हुई। यदि विभाग में पर्याप्त मात्रा में स्टॉफ हो तो एक अधिकारी ने ११ माह में जितने नमूने लिए इससे तीन गुना अधिक नमूने अधिकारियों द्वारा लिए जा सकते थे। विभाग में एक ही अधिकारी होने से उनका अधिकांश समय ठेला संचालक, गुमटी संचालक, चाय विके्रता, चाट विक्रेता, खाद्य सामग्री निर्माता आदि की समस्याओं के निराकरण के लिए कार्यालय में ही बीत जाता है। ऐसे में वे कब जिले का दौरा करें और कब मिलावटखोरों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करें। विभाग की इसी कमजोरी का लाभ जिले के मिलावटखोर उठा रहे हैं और जिले की आम जनता को खुलेआम लूट रहे हैं।
स्टॉफ की कमी से हो रही परेशानी
स्टॉफ की कमी की वजह काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सभी कार्य ऑनलाइन होने से लोगों की समस्याएं हल करने में अधिकांश समय कार्यालय में उपस्थित रहना पड़ता है। रिक्त पदों के लिए शासन स्तर पर जानकारी भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि जल्द पदस्थापना होगी। मिलावटखोरों के खिलाफ भी समय समय पर कार्रवाई की जाती है।
- राजू सोलंकी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, खाद्य एवं औषधि विभाग
Published on:
08 Dec 2017 10:51 pm
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