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कांग्रेस पर्यवेक्षकों की मनमानी पर तीखे हुए पूर्व विधायक के बोल

मनमानी करने के लगाए गए आरोप, प्रदेश अध्यक्ष ने लिया गंभीरता से

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Ex MLA & Congress Leader's Meeting In Bhopal

पूर्व विधायकों के सम्मेलन में प्रदेश स्तर पर पहुंची शिकायत

नीमच. सोमवार को हुई भोपाल में पूर्व कांग्रेस विधायकों के सम्मेलन में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षकों को लेकर गुस्सा फूटा। पर्यवेक्षकों पर मनमानी करने के आरोप चस्पा किए गए। पर्यवेक्षकों पर यहां तक आरोप लगाए गए कि विधानसभा में टिकट किसे मिलेगा ये भी वे स्वयं तय करेंगे। इस प्रकार की बातों को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने भी गंभीरता से लिया।


प्रदेश अध्यक्ष ने लिया गंभीरता से
सोमवार को सुबह ११ बजे शिवाजी नगर स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय इंदिरा भवन पर प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने प्रदेश के पूर्व विधायकों का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेशभर से १५० से अधिक पूर्व विधायक उपस्थित थे। इनमें नीमच जिले से ४ पूर्व विधायक जिनमें पूर्व कैबीनेट मंत्री नरेंद्र नाहटा, मनासा से विजेंद्रङ्क्षसह मालाहेड़ा, नीमच से डा. सम्पतस्वरूप जाजू और नंदकिशोर पटेल भोपाल पहुंचे थे। बैठक में मंदसौर के पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल ने ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षकों की कार्यशैली पर प्रश्न उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पर्यवेक्षक अपने तरीके से काम कर रहे हैं। इससे पार्टी को लाभ नहीं मिलेगा। पिछले तीन महीनों में ऑल इंडिया कॉग्रेस कमेटी की ओर से भेजे गए तीन पर्यवेक्षक क्षेत्र को दौरा कर चुके हैं। बताया जाता है कि इसे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने स्वीकार करते हुए कहा कि मेरे पास प्रदेश के कई क्षेत्रों से इस संबंध में शिकायतें आई हंै। मैं इस बारे में हाईकमान से चर्चा कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराऊंगा।


लो प्रोफाइल व्यक्ति को मिले टिकट
विधायकों के सम्मेलन में प्रदेश के ५ चुनिंदा पूर्व विधायकों को बोलने का अवसर दिया गया। इनमें नीमच के पूर्व विधायक डा. सम्पतस्वरूप जाजू भी एक थे। डा. जाजू ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली से लेकर पंचायत स्तर तक राजनीति में भी कांगे्रेस संघ से मुकाबला करने की बात कर रही है। संघ से कैसे निपटा जाए। मंदसौर संसदीय क्षेत्र संघ की नर्सरी माना जाता है। यहां से भाजपा (जनसंघ) ने प्रदेश को दो मुख्यमंत्री व एक प्रदेश अध्यक्ष दिया। वहीं कांग्रेस ने इस संसदीय क्षेत्र से एक मुख्यमंत्री दिया। मंदसौर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस वर्ष १९५२ से ही संघ से आज तक मुकाबला कर रही है। मंदसौर संसदीय क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है। जबकि सन १९५२ से लेकर आज तक हुए विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से अधिक बार आठों सीटों पर कब्जा किया। भाजपा ने केवल सन १९९० में आठों सीटों पर कब्जा किया था। इससे पूर्व १९७७ में जनता पार्टी ने किया था। संघ से लडऩे के लिए मंदसौर संसदीय क्षेत्र से लडऩे के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जो शैली और जो क्षमता है उसका अनुसरण करके ही हम संघ से निपट सकते हैं। यह शैली मंदसौर के संसदीय क्षेत्र में १५ वर्ष पूर्व तक थी, आज नहीं है। प्रदेश में परिवर्तन की आहट है। परिवर्तन का लाभ तभी मिलेगा जब कांग्रेस गणेश परिक्रमा करने वालों को एक तरफ करके स्वच्छ छवि और लो प्रोफाइल व्यक्ति को टिकट देगी। तब हम निश्चित रूप से प्रदेश में सरकार बनाएंगे।