
vakratunda mahakaya mantra in hindi
नीमच. दस दिवसीय गणेश उत्सव नजदीक है। इस उत्सव में बड़े-बड़े पांडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है, अनंत चतुर्दशी पर धूमधाम से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। हर वर्ष इको फ्रेंडली प्रतिमाओं का उपयोग करने के लिए विभिन्न संस्थाएं, प्रकृति प्रेमी जागरुकता अभियान भी चलाते हैं। मिट्टी, कागज की लुगदी सहित अन्य इको फ्रेंडली गणेश की प्रतिमाएं तो आपने देखी होगी लेकिन नीमच के एक युवा ने गोबर से अनोखी गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया है। प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है उससे पहले ही इनकी चर्चा होने लगी है।
रूरल मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया, अब जागरुक करना चाहते हैं लोगों को-
शहर के ग्वालटोली में रहने वाले युवा यशवंत प्रजापति का पारिवारिक पुश्तैनी व्यवसाय ईंट भट्टे का रहा है। अपने शौक के चलते उन्होने देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार से रूरल मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी किया। मैनेजमेंट कॉलेज में कुछ समय पढ़ाया भी। रूरल मैनेजमेंट के तहत ग्रामीण परिवेष के प्रबंधन पर खास जोर दिया जाता है। इसी के चलते उन्होने कुछ वर्ष पूर्व गिर नस्ल की गाय का पालन शुरू किया। गाय के दूध के उपयोग के साथ ही उसके गोबर का भी अधिकाधिक उपयोग किस तरह किया जाए इसके बारे में यशवंत ने काफी नवाचार किए हैं। पिछले दो वर्ष से वे स्वयं के घर में गोबर से गणेश प्रतिमाएं बनाकर गणेश उत्सव के दौरान पूजन करते आ रहे हैं। अपने घर से की गई इस शुरूआत को वे मुहिम बनाना चाहते हैं।
व्यवसाय करना नहीं अपनी संस्कृति और पर्यावरण के प्रति जागरुक करना उद्देश्य-
यशवंत प्रजापति ने बताया कि गोबर की प्रतिमाएं बनाने के लिए जितना गोबर लिया जाता है उसका ५ प्रतिशत हिस्सा मिट्टी का मिलाया जाता है। इसे गूंथकर बहुत सरल तरीके से भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाएं बनाई जा सकती हैं। अपने घर पर अब तक उन्होने १०८ प्रतिमाएं तैयार की हैं, जिन्हेें इस सप्ताह में अंतिम रूप दे देंगे। प्रतिमाओं की एक और खासियत यह है कि इन गणेश प्रतिमाओं किसी प्रकार का रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। बल्कि घी के मिश्रण से सिंदूर चढ़ाया जा रहा है। प्रतिमाओं के लिए आकर्षक परिधान भी यशवंत ने खुद ही तैयार करवाए हैं। यशवंत प्रजापति की इच्छा है कि पर्यावरण के लिए अनुकूल और भारतीय संस्कृति के अनुसार निर्मित की गई गोबर की इन प्रतिमाओं को देखने के लिए वे कलेक्टर राकेशकुमार श्रीवास्तव और विधायक दिलीपसिंह परिहार को आमंत्रित करना चाहते हैं। ऐसा इसलिए कि इन जिम्मेदारों के प्रोत्साहन से जो लोग इस तरह की प्रतिमाएं बनाना सीखना चाहते हैं उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा सके। यह युवाओं के रोजगार का भी अच्छा माध्यम हो सकता है।
Published on:
13 Aug 2018 11:00 pm
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