
सोनोग्राफी सेंटर पर इस तरह लगा हुआ था ताला।
नीमच. आखिर ऐसा क्या हो गया कि लोगों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी सामने आ गई कि जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति के एक सदस्यों को ऐसा कहना पड़ा कि अब भी समय है सुधर जाओ नहीं तो जनता कभी भी जुलूस निकाल देगी। यह केवल एक चेतावनी नहीं होता खुली चुनौती ही है।
जमीन पर मरीज, कक्ष से चिकित्सक नदारद
जैसे जैसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिला चिकित्सालय में भी अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। कहने को तो अस्पताल प्रशासन ने ट्रॉमा सेंटर शुरू कर दिया, लेकिन नई व्यवस्थाएं नहीं जुटाने से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को वार्डों में बिस्तर कम होने से मरीजों को जमीन पर लेटाकर ही उपचार किया जा रहा था। अव्यवस्थाओं लेकर जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति ने अस्पताल प्रबंधन को 7 दिन व्यवस्था सुधारने की चेतावनी दी है। इस समयावधि में हालात नहीं सुधरे तो समिति ने आंदोलन करने की बात कही। जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति की ओर से सीएमएचओ को अवगत कराया गया है कि पिछले छह महीने में अस्पताल की स्थित बद से बदतर हो गई है। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने की बात कही जाती है, लेकिन उन्हें आज तक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई है। सोनोग्राफी सेंटर में मशीन तो उपलब्ध है, लेकिन अधिकांश समय कार्यालय बंद ही रहता है। सबसे अधिक महिलाओं को परेशानी होती है। जिला अस्पताल में नि:शुल्क सोनोग्राफी की जाती है। इसके निजी सोनोग्राफी सेंटर पर 800 रुपए तक लिए जाते हैं। इससे गरीब और मध्यम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। एक्स रे मशीन व्यवस्थित नहीं होने से भी मरीजों को निजी सेंटर के भरोसे रहना पड़ रहा है। जिला चिकित्सालय में एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ होने से महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नेत्र विशेषज्ञ के पद पर महिला चिकित्सक पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें मरीजों का इलाज करने में डर लगता है। केवल सामान्य उपचार ही कर सकती है। तत्कालीन कलेक्टर ने उन्हें प्रशिक्षण के लिए स्थानीय गोमाबाई नेत्रालय भी भेजा था। बावजूद इसके उनकी कार्यशैली विशेष बदलाव नजर नहीं आया। अस्पताल में मरीजों को ओपीडी में सबसे अधिक परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है। अपने निर्धारित समय पर चिकित्सक कक्ष में मौजूद ही नहीं रहते। बीमार मरीजों को काफी देर खड़े रहकर चिकित्सक को इंतजार करना पड़ता है। इन सब बातों को दृष्टिगत रखते हुए जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि समय रहते अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधार ली जाएं अन्यथा एक दिन जनता जुलूस निकालने से भी गुरेज नहीं करेगी। समिति में सदस्य संदीप राठौर ने बताया कि जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर जल्द ही नवागत कलेक्टर राकेशकुमार श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगेे।
मरीजों को लांघता देख चौक गए
जिला चिकित्सालय में बुधवार को चौकाने वाले नजारे देखने को मिले। सामान्य वार्ड में बिस्तरों की कमी के चलते मरीजों को जमीन पर गद्दे डालकर ही उनका उपचार करते देखा गया। इतना भर होता तो भी चल जाता। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें जमीन पर लेटने में भी कोई हर्ज नहीं दिखता, लेकिन चिंता की बात तब होती है जब चिकित्सक दूसरे मरीज तक पहुंचने के लिए उन्हें लांघकर जाते हैं। ऐसे नजारे आज दिखे। कुछ पल की देर हो गई नहीं तो कैमरे में कैद हो जाते। इस तरह मरीजों का उपचार जिला चिकित्सालय (नवीन ट्रॉमा सेंटर) में हो रहा है। इस ओर जिला अस्पताल प्रबंधन का ध्यान अब तक नहीं गया है।
ट्रॉमा सेंटर में नहीं हैं सुविधाएं
ट्रॉमा सेंटर शुरू जरूर कर दिया गया है, लेकिन वहां कोई सुविधाएं नहीं है। पुराने बिस्तर को ही वहां सिफ्ट किया गया है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। जल्द नए बिस्तर खरीदे जाएंगे।
-डा. बीएल बोरीवाल सिविल सर्जन
Published on:
08 Aug 2018 10:50 pm
बड़ी खबरें
View Allनीमच
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
