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Navratri 2022: भादवामाता धाम में मिलता है ‘आरोग्य’ का आशीर्वाद, जानें क्यों यहां भक्त छोड़ जाते हैं जिंदा बकरा-बकरी

'भादवामाता धाम' एक ऐसा मंदिर है जिसमें विराजित भादवामाता का यह रूप अपने आप में चमत्कारिक और दिव्य है। यहां रोगी आते हैं लेकिन स्वस्थ होकर जाते हैं

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नीमच। नवरात्रि पर्व का आज चौथा दिन है। अब तक हम मध्यप्रदेश में कई रूपों और अलग-अलग नाम से स्थापित मां दुर्गा के चमत्कारों की चर्चा कर चुके हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं नीमच शहर स्थित मालवा की वैष्णों देवी के चमत्कार। जहां लोग आते भले ही बीमार हों, लेकिन यहां से जाते वक्त एक स्वस्थ शरीर उनके साथ होता है। नीमच शहर से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 'भादवामाता धाम' एक ऐसा मंदिर है जिसमें विराजित भादवामाता का यह रूप अपने आप में चमत्कारिक और दिव्य है। यहां आने वाले भक्तों की आस्था इतनी है कि मीलों पैदल चलकर वे यहां आते हैं और अपनी बीमारियों से स्वस्थ होकर लौट जाते हैं।

ये है मान्यता
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के अनुसार यहां माता हर रात मंदिर के गर्भ गृह से निकलकर मंदिर के आंगन में किसी एक समय में अदृश्य शक्ति के रूप में टहलने निकलती हैं और यहां अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर उनकी काया को निरोगी बनाती हैं। इसी आस में मंदिर के परिसर में इधर-उधर डेरा डाले लकवा, दृष्टिहीनता और कोढ़ से ग्रस्त कई ऐसे रोगी देखने को मिल जाते हैं जो निरोगी होने की उम्मीद में धाम में आते हैं।

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यह भी है चमत्कार

मान्यता यह भी है कि टहलते समय माता की दृष्टि सबसे पहले जिस किसी श्रद्धालु पर भी पड़ जाती है वह सदा के लिए रोगमुक्तऔर सुखी हो जाता है। यहां आने वाले सभी भक्तों का कहना है कि यहां से बहुत से भक्त आते भले ही दूसरों के सहारे हों, लेकिन जाते समय अपने पैरों पर खड़े होकर जाते हैं। माता के इसी अद्भुत चमत्कार के कारण यहां सालभर लकवाग्रस्त, कोढ़ और दृष्टिहीनता से पीडि़त देशभर के हजारों भक्तों का आना-जाना लगा रहता है।

चमत्कारी बावड़ी

भादवामाता मंदिर के प्रांगण में एक ऐसी अति प्राचीन और चमत्कारी बावड़ी भी है जिसके बारे में मान्यता है कि इस बावड़ी के कारण माता का यह मंदिर आरोग्य तीर्थ के रूप में प्राचीनकाल से ही प्रसिद्ध है।

जानें रोचक किस्सा
यहां प्रचलित लोक कथाओं और किस्से कहानियों के अनुसार जब से माता यहां विराजित हुई हैं तभी से यह बावड़ी भी अस्तित्व में आई है और माता ने खुद ही यहां आने वाले भक्तों को रोग मुक्त करने के लिए यहां जमीन से जल की धारा निकाली थी। इसमें स्नान करके ही भक्त रोगों से मुक्ति पाते हैं। यहां प्रचलित मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इस बावड़ी का जल अमृत समान है। माता ने स्वयं कहा है कि जो भी श्रद्धालु इस बावड़ी के जल से स्नान करेगा, वह सदा के लिए रोग मुक्त हो जाएगा। यहां आने वाले कुछ भक्तों का मानना है कि उन्होंने यहां माता के कई ऐसे चमत्कारों को महसूस किया है जिनको याद करके रोंगटे खड़े हो जाते हैं और उनको शब्दों में बताना बहुत मुश्किल है।

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चांदी के सिंहासन पर विराजमान हैं मां
इस 'भादवामाता धाम' मंदिर में मां चांदी के सिंहासन पर विराजमान है। उनके नीचे नौ रूपों में दुर्गा मां विराजित हैं। उनके सिंहासन के निकट एक ऐसी दुर्लभ ज्योति है जिसके बारे में कोईनहीं जानता कि यह ज्योति कब से यहां यूं ही अखण्ड रूप से प्रज्जवलित है। जबकि मंदिर के पुजारियों का मानना है कि यह ज्योति सैकड़ों सालों से इसी तरह अखण्ड प्रज्जवलित है।

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प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल

मध्य प्रदेश के नीमच जिले में स्थित भादवामाता के इस मंदिर को विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त है। इसी कारण यह मंदिर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में विशेष रूप से गिना जाता है। राजस्थान के कोटा से इस मंदिर की दूरी लगभग 180 किलोमीटर, भीलवाड़ा से 120 किलोमीटर, मंदसौर से 70 किलोमीटर और उदयपुर से लगभग 135 किलोमीटर है। ट्रेन से जाने वाले यात्रियों के लिए नीमच के लिए ट्रेनों की अच्छी सुविधा है। नीमच रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी मात्र 24 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 59 नीमच को कई पड़ौसी शहरों और राज्यों से जोड़ता है। इसके अलावा भादवामाता मंदिर के लिए बसें भी आसानी से मिल जाती हैं। कई राज्यों के प्रमुख शहरों से यहां के लिए नियमित बसों की व्यवस्था है।

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