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गरीबों की मददगार रेडक्रास सोसायटी राजनीतिक दांवपेंच में उलझी

- पिछले डेढ़ साल से नहीं हुए रेडक्रास के चुनाव- न कर्मचारियों को वेतन, न मरीजों को मिल रही सुविधाएं

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Schools charge fees but do not teach Lessons of the service of the suffering humanity

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नीमच. भारतीय रेडक्रास सोसायटी की जिला शाखा नीमच का नाम एक जमाने में पूरे मध्यप्रदेश में शीर्ष पर था। अस्पताल में गरीब मरीजों से अब कोई ठीक से बात तक नही करता है जबकि रेडक्रास के जरिए कई गरीबों को एंबुलेंस सुविधा और आर्थिक मदद मुहैया हो जाया करती थी। लेकिन बीते डेढ़ वर्ष से रेडक्रास सोसायटी की गतिविधियां चरमराई हुई है।राजनैतिक पैंतरेबाजी के कारण यहां के चुनाव भी अधर में हैं।
चेयरमेन के इस्तीफे के बाद से ही चुनाव का इंतजार-
पूर्व में रेडक्रास सोसायटी की गतिविधियां व्यवस्थित ढंग से संचालित होती थी। खासतौर से रक्तदान शिविरों का वृहद स्तर पर आयोजन नीमच रेडक्रास की देन रही है। लोगों में रक्तदान के प्रति जागरुकता का भाव पैदा हुआ और यहां के ब्लड बैंक ने जरूरत होने पर उदयपुर तक के मरीजों के लिए रक्त उपलब्ध करवाया है।इसमें भी बीपीएल कार्डधारी जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क रक्त मुहैया कराया जाता था।आधी रात में भी एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध हो रही थी। 5 एंबुलेंस का संचालन रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा था। वर्तमान में हालात यह हैं कि सरकारी एंबुलेंस तो गरीब मरीजों के लिए उपलब्ध ही नहीं है, निजी एंबुलेंस संचालक गरीबों की बीमारी में भी कमर तोड़ रहे हैं। रेडक्रास सोसायटी ने रोगियों की सेवा के अलावा सामाजिक दायित्व भी पूरे किए।गरीब ठेला चालकों को गर्मी और बरसात से बचाने के लिए ठेलों पर छतें लगवाई गई तो राहगिरों के पैदल भ्रमण करने वालों के विश्राम के लिए जगह-जगह कुर्सियां लगवाई।रेडक्रास की गतिविधियों में ब्लड कंपोनेंट यूनिट स्थापित करने की योजना तैयार हो गई थी लेकिन विवाद होना शुरू हो गए और चेयरमेन रविंद्र मेहता को इस्तीफा देना पड़ा।बताते हैं नेताओं को इन गतिविधियों के कारण ज्यादा परेशानियां होने लगी थी। रेडक्रास के चुनाव 2016 में हुए थे इसके बाद यहां किसी ने चुनाव करवाने की जहमत ही नहीं उठाई। 2016 के बाद से ही प्रशासन के हाथ में रेडक्रास की कमान है।
कर्मचारियों को नहीं मिल रही तनख्वाह, रोगियों को नहीं मिल रही मदद-
रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से मूक बधिर बच्चों के लिए छात्रावास, एवं विद्यालय, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का छात्रावास एवं विद्यालय तथा वृद्धाश्रम संचालित किए जाते हैं। इसके अलावा ब्लड बैंक संचालित होता है।लेकिन वर्तमान में इन संस्थाओं के कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा है।ऐसे में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पिछले दिनों विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ मारपीट का मामला भी सामने आया था, जिसकी जांच अब तक चल ही रही है। पहले दुर्घटना में घायल होने वाले गरीब व्यक्तियों को उपचार के लिए रेडक्रास के जरिए आर्थिक मदद मिल जाया करती थी अब वह भी बंद हो गई है। मृत व्यक्तियों के परिजनों के लिए भी रेडक्रास मद से कोई राहत राशि नहीं निकलती। अस्पताल के हालात यह हो गए हैं कि मरीजों की परेशानियां लगातार बढ़ रही है। अस्पताल संघर्ष समिति जैसे समूह सामने आने लगे हैं। इतनी परेशानियों के बावजूद भी रेडक्रास के चुनाव लगातार टलते जा रहे हैं। पिछले वर्ष चुनाव कराने की तैयारी कर ली गई थी लेकिन फिर से राजनैतिक पैंतरेबाजी में यह मामला टाला गया। अब तक भी चुनाव न होने के पीछे कारण राजनैतिक माने जा रहे हैं।
वर्जन-
मुझे हाल ही में रेडक्रास का प्रभार मिला है। अभी कार्य विवरण समझ रहे हैं।कलेक्टर भी नए हैं। वे पदेन अध्यक्ष हैं। चुनाव एवं रेडक्रास की गतिविधियों के बारे में कलेक्टर महोदय के समक्ष चर्चा करेंगे, जो भी निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। चुनाव जल्द करवाने का प्रयास करेंगे।-कमलेश भार्गव, प्रभारी रेडक्रास सोसायटी जिला शाखा एवं जिला पंचायत सीईओ
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