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वकीलों ने एकजुटता दिखाते हुए किया ऐसा कुछ कि …

विरोध स्वरूप नीमच, जावद और मनासा में कार्य से विरत रहे अभिभाषक

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Neemuch Letest Advocate News

मंदसौर में वकीलों के खिलाफ प्रकरण दर्ज होने पर विरोध स्वरूप कार्य से विरत रहे अभिभाषक।


नीमच. पिछले दिनों मंदसौर में ३ अभिभाषकों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। इसके विरोध में मंदसौर में पिछले ४ दिनों से अभिभाषक न्यायालयीन कार्य से विरत हैं। मंगलवार को इसके विरोध में नीमच जिले में भी अभिभाषकों ने कार्य से विरत रहकर विरोध दर्ज कराया।
विदित हो कि अभिभाषक संघ मंदसौर के पूर्व अध्यक्ष निर्मल जोशी, युवा अभिभाषक उमेश परमार और राम राठौर के खिलाफ शहर कोतवाली में प्रकरण दर्ज किया गया है। इसको लेकर मंदसौर अभिभाषक संघ पिछले ४ दिनों से विरोध स्वरूप न्यायालयीन कार्य से विरत है। अभिभाषकों की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि बिना जांच के ही शहर कोतवाली टीआई जितेंद्र यादव ने अभिभाषकों पर झूठा मुकदमा दर्ज किया है। इसके विरोध में मंगलवार को नीमच, जावद और मनासा न्यायालय में अभिभाषक कार्य से विरत रहे। अभिभाषकों ने दर्ज प्रकरण को लेकर विरोध दर्ज कराया। मंगलवार को अभिभाषक कोर्ट में तो आए, लेकिन किसी ने भी न्यायलीन कार्य में भाग नहीं लिया। बार एसोसिएशन कक्ष में मंदसौर के अभिभाषकों पर दर्ज प्रकरण की कड़े शब्दों में निंदा की गई। नीमच अभिभाषक संघ अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा कि हम मंदसौर के अभिभाषकों के साथ खड़े हैं। अभिभाषकों पर पुलिस ने झूठा मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। दोषी टीआई पर कार्रवाई होना चाहिए। वरिष्ठ अभिभाषक तेजपाल जैन ने कहा कि पुलिस को एफआईआर करने से पहले मामले की जांच किए जाना चाहिए। अभिभाषकों के खिलाफ ऐसे प्रकरण दर्ज होना द्वेषता को दर्शाता है। नियम के विरूद्ध पुलिस ने एफआईआर की है। अभिभाषक विजयशंकर शर्मा ने कहा कि एक नर्स कोर्ट में आवेदन तैयार करवाने के लिए आई थी, तब अभिभाषक ने मना। कार्य की व्यस्तता के चलते ऐसा होता है। पुलिस ने नर्स के आवेदन पर तुरंत अभिभाषकों पर प्रकरण दर्ज कर लिया, जो कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष सुनील जोशी ने कहा कि अभिभाषकों पर प्रकरण दर्ज करने वाले टीआई के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। टीआई पर तुरंत कार्रवाई होना चाहिए और इस प्रकरण का खात्मा होना चाहिए। अभिभाषक नरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि अभिभाषक विधि के जानकार होते हैं। अभिभाषक मात्र समझाइश दे सकते हैं। नर्स को समझाइश दी थी, लेकिन समझाइश पर ही पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया जो कि अभिभाषकों के अधिकारों की हत्या है।