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युवाओं के साथ ठगी करना पड़ा भारी, अब खानी पड़ेगी जेल की हवा

युवाओं के साथ ठगी करना पड़ा भारी, अब खानी पड़ेगी जेल की हवा

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एक युवक को जिला निर्वाचन अधिकारी एवं दंडाधिकारी ने पहले जिला बदर कर दिया जब उसने निर्वाचन आयोग से इसकी शिकायत की तो उसे मतदान के लिए विशेष अनुमति देनी पड़ी

नीमच. स्वयं को जनगणना अधिकारी बताकर 600 बेरोजगारों से रोजगार दिलाने के नाम पर बेईमानी पूर्वक रुपए ऐंठकर अपनी महिला मित्र के साथ फर्जी दस्तावेज बनाने वाले को मनासा न्यायालय ने दोषी मानकर सात वर्ष की सजा सुनाई व जेल भेज दिया। जबकि महिला को दोषी पाकर तीन वर्ष के कारावास की सजा से दण्डित किया।
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आरके शर्मा मनासा द्वारा पारित निर्णय की जानकारी देते हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक श्याम समदानी ने बताया कि 27 अगस्त 2012 को फरियादी पिंकेश, अर्जुन, नरेन्द्र, देवीलाल, मनीष, हरिओम, मदनलाल आदि ने थाना मनासा में आवेदन पत्र प्रस्तुत कर आरोपी अजीत पिता गोपाल गोस्वामी निवासी बावड़ा द्वारा स्वयं को जनगणना अधिकारी बताकर करीब 600 बेरोजगार युवकों को सर्वे कार्य के लिए नियुक्ति दी गई। पंजाबी धर्मशाला मनासा में प्रशिक्षण भी दिया गया। इन सभी बेरोजगारों को आरोपी अजीत गोस्वामी द्वारा स्वयं को कलेक्टर का अजीज मित्र होना बताया गया। सभी युवाओं को विश्वास में लेकर आवेदन के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से 500 रुपए लेकर रसीद प्रदान की गई थी। पिंकेश से 25 हजार रुपए, मदनलाल से 70 हजार रुपए, अर्जुन से 1 लाख 500 रुपए अतिरिक्त लेकर सभी बेरोजगारों को जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्ति दी गई। साथ ही प्रतिमाह 7 हजार रुपए वेतन देना तय किया गया। समय पर वेतन नहीं मिलने पर इन बेरोजगारों द्वारा आरोपी अजीत गोस्वामी से मांग करने पर उसके द्वारा अनेक प्रकार से बहाने किए गए। काफी समय के बाद आरोपी अजीत गोस्वामी, अन्य साथी आरोपी खुशबू पिता अल्ताफ खान निवासी मनासा के साथ फरार हो गया। जिस पर से पीडि़त बेरोजगारों द्वारा थाना मनासा में रिपोर्ट दर्ज की गई तथा अनुसंधान में आरोपी अजीत गोस्वामी के साथ ही खुशबू खान व राजेश पिता बापूलाल धाकड़, निवासी बड़वन को अपराध में सलिप्त पाकर गिरफ्तार कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से प्रकरण में शिकायतकर्ता बेरोजगारों के साथ कुल 29 साक्षियों के कथन करवाए गए। न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में यह उल्लेख किया गया कि आरोपी अजीत गोस्वामी जनगणना अधिकारी नहीं होते भी उसके द्वारा अपने आपको जनगणना अधिकारी बताकर कूटरचित नियुक्ति पत्र भी जारी किए गए एवं अनुबंध पत्र की कूटरचना की गई एवं आरोपी खुशबू खान उसके इस अपराध में सहयोगी रही। आरोपी अजीत गोस्वामी को धारा 420 भादवि के अंतर्गत तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा तीन हजार रुपए अर्थदण्ड, धारा 467 भादवि के अधीन दोषी पाकर सात वर्ष के कारावास एवं तीन हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। जबकि आरोपी खुशबू को धारा 420/120 बी भादवि में दोषी पाकर तीन वर्ष के सश्रम कारावास व तीन हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। आरोपी राजेश को दोषमुक्त किया गया।