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नीमच. अब तक होता यह आया है कि अशासकीय शिक्षण संस्थाओं की कार्यशैली से अभिभावक ही अधिक परेशान होते आए हैं। अब ऐसा हो रहा है कि शासन के खिलाफ अशासकीय शिक्षण संस्थाओं ने सड़क पर उतरने का मानस बना लिया है। बताया जा रहा है कि आरटीई के तहत जिले की ३६७ अशासकीय शिक्षण संस्थाओं का सत्र २०१६-१७ का करीब ४ करोड़ ७४ लाख ७३ हजार ३१७ रुपए का भुगतान अब तक नहीं किया गया है, जबकि शैक्षणिक सत्र २०१७-१८ भी बीत चुका है।
दूसरा सत्र भी बीत गया नहीं हुआ भुगतान
जिला अशासकीय शिक्षण संस्था संघ के जिलाध्यक्ष अजय भटनागर ने बताया कि जिले में कुल ३६७ अशासकीय शिक्षण संस्थाएं संचालित है। शिक्षा का अधिकार के तहत प्रत्येक स्कूल में २५ फीसदी सीटें इसके तहत भरना अनिवार्य है। शासन स्तर पर प्रत्येक विद्यार्थी के मान से ४ हजार ४१९ रुपए का भुगतान किया जाता है। शैक्षणिक सत्र २०१६-१७ का इन स्कूलों को आरटीई के तहत कुल भुगतान ४ करोड़ ७४ लाख ७३ हजार ३१७ रुपए बनता है। अब तक इस राशि का भुगतान नहीं किया गया। आश्चर्य की बात यह भी है कि सत्र २०१७-१८ के बारे में तो शिक्षा विभाग या शासन स्तर पर कोई बात ही नहीं करना चाह रहा है। इस मान से देखा जाए तो दो सत्रों को करीब १० करोड़ रुपए अशासकीय शिक्षण संस्थाओं का भुगतान शासन स्तर पर अटका पड़ा है। इतनी बड़ी राशि अटकने का सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों पर पड़ रहा है। इसके उलट अशासकीय शिक्षण संस्थाओं पर इतने नियम लाद दिए गए हैं कि विद्यार्थियों से फीस वसूल तक में दिक्कतें आ रही हैं।
कल निकालेंगे रैली सौंपेंगे भगवान के नाम ज्ञापन
भटनागर ने बताया कि करोड़ों रुपया बकाया होने और कहीं सुनवाई नहीं होने पर हमने निर्णय लिया हैं कि १७ अप्रैल से शासन के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे। जिला प्रशासन से अनुमति लेकर मंगलवार सुबह शहर के प्रमुख मार्गों से वाहन रैली निकाली जाएगी। रैली समापन पर भगवान को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही शासन को सद्बुद्धि देने के लिए यज्ञ भी किया जाएगा। भगवान को सौंपे जाने वाले ज्ञापन के माध्यम से मांग की जाएगी कि भगवान शासन को सद्बुद्धि दो कि जल्द ही हमारी बकाया राशि का जल्द भुगतान करे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा जाएगा। भटनागर ने बताया कि १७ अप्रैल के प्रदर्शन के बाद ७ दिन तक इंतजार किया जाएगा। इसके बाद भी भुगतान नहीं होता है तो क्रमिक भूख हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी शासन स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं होती है तो जिले की सभी अशासकीय शिक्षण संस्थाओं द्वारा शासन को असहयोग किया जाएगा। शासन के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे।
आधार अनिवार्य करने से भी आ रही दिक्कत
भटनागर ने बताया कि शासन स्तर पर आरटीई के तहत आधार अनिवार्य किया गया है। छोटे बच्चों के फिंगर प्रिंट ही सही नहीं आते। ऐसे में आधार कार्ड में त्रुटि सुधरवाने में परिजनों को काफी परेशानी हो रही है। जहां माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आधार की अनिवार्यता पर रोक लगा रखी है वहीं शासन स्तर पर इसे अनिवार्य किया जा रहा है। जो सीधे सीधे कानून का ही उल्लंघन है। शासन द्वारा अशासकीय शिक्षण संस्थाओं को परेशान करने के लिए नित नए नए नियम बनाए जा रहे हैं। इसके पीछे शासन की यह मंशा हो सकती है कि कैसे भी कर अशासकीय शिक्षण संस्थाओं को राशि का भुगतान नहीं करना पड़े।
निजी संस्थाओं पर दर्ज हो रहे प्रकरण
शासन ने दो साल से आरटीई की फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया है। फीस नियंत्रण और फीस वसूली को प्रताडऩा मानकर शासन स्तर पर निजी शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों से इस अन्यायपूर्ण और दमनकारी कार्रवाई पर कोई सुनवाई करने तक के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में मजबूर होकर व जनता को वस्तुस्थिति बताने के लिए भगवान की शरण में जाने का निर्णय लिया है। जिले के स्कूलों की करीब पौने ५ करोड़ रुपए की राशि का भुगतान नहीं करने पर मंगलवार को वाहन रैली निकाली जाएगी। भगवान के नाम ज्ञापन सौंपकर सद्बुद्धि यज्ञ भी किया जाएगा।
- अजय भटनागर, जिलाध्यक्ष अशासकीय शिक्षण संस्था संघ नीमच
Published on:
16 Apr 2018 09:57 pm
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