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एमपी के नीमच में दंगा, पुलिस ने भांजी लाठियां, छोड़े आंसू गैस के गोले

पुलिस एक्शन में आई और उपद्रवियों को कंट्रोल करने के लिए लाठियां भांजना शुरू कर दिया, इसके बाद भी जब मामला नियंत्रण में नहीं आया तो पुलिस को आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े.

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एमपी के नीमच में दंगा, पुलिस ने भांजी लाठियां, छोड़े आंसू गैस के गोले

एमपी के नीमच में दंगा, पुलिस ने भांजी लाठियां, छोड़े आंसू गैस के गोले

नीमच. राजस्थान की बार्डर से सटे मध्यप्रदेश के नीमच जिले में अचानक दंगों की आग भड़क गई, सूचना मिलते ही पुलिस एक्शन में आई और उपद्रवियों को कंट्रोल करने के लिए लाठियां भांजना शुरू कर दिया, इसके बाद भी जब मामला नियंत्रण में नहीं आया तो पुलिस को आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े, इधर पुलिस अधीक्षक ने दंगों की स्थिति कंट्रोल नहीं होने पर गोली मारने की बात भी कही, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि हमेशा गोली पैर में ही मारें, ताकि किसी की जान नहीं जाएं।

आपको बतादें कि नीमच जिले में कोई दंगा नहीं हुआ है, ये तो पुलिस द्वारा दंगों की स्थिति में हालातों पर काबु पाने के लिए अभ्यास किया था, जिसे सीधे शब्दों में मॉकड्रिल कहते हैं। इस दौरान पूरे जिले के थाना प्रभारी सहित पुलिस बल और सभी अधिकारी मौजूद थे।

दरअसल, जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन के निर्देश पर पुलिस लाइन परिसर में पुलिसकर्मियों ने मॉकड्रिल की। इसमें दंगाइयों से निपटने के लिए आंसू गैस छोडऩे व लाठीचार्ज का अभ्यास किया गया। पुलिस अधीक्षक ने अभ्यास के दौरान आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। रविवार सुबह 10 बजे लाइन में पुलिस टीम का जज्बा परखा गया। दंगा होने की स्थिति में पुलिस के एक्शन में आने के साथ ही इन हालात से निपटने के लिए किस रैंक के अफसरों को किस तरह से भूमिका को तय करके एक्शन में आना है, इसका अभ्यास किया गया, दंगाइयों से निपटने के लिए पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी व उपनिरीक्षकों ने मॉकड्रिल की। इस दौरान दंगाई बने पुलिस कर्मियों पर गोली चली, लाठीचार्ज हुआ और गोले भी दागे गए कर्मियों को दंगे के दौरान गंभीर बातों से अवगत कराया गया। एसपी के नेतृत्व में हुई ड्रिल में सभी थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुंदरसिंह कनेश, सीएसपी राकेशमोहन शुक्ल शामिल हुए।

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दंगाइयों से निपटने दी एसपी ने सीख

ड्रिल के दौरान एसपी ने बताया कि जब कहीं भी दंगा हो जाए तो सबसे पहले दंगाइयों से बातचीत की जाए। जब न माने तो आंसू गैस के गोले दागे जाए, फिर भी न मानें तो लाठीचार्ज किया जाए। इसके बावजूद भी जब हालात काबू में न आएं तो फायरिंग की जाए। यह ध्यान रहे कि गोलियां पैरों पर मारी जाएं, जिससे किसी की जान न जा सके। उन्होंने बताया कि मॉकड्रिल के दौरान जो कमियां पाई गई उन्हें भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।