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स्वीटी बावेल सांसारिक सुख छोड़कर बनी साध्वी हितप्रज्ञा श्रीजी मसा

स्वीटी बावेल सांसारिक सुख छोड़कर बनी साध्वी हितप्रज्ञा श्रीजी मसा

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स्वीटी बावेल सांसारिक सुख छोड़कर बनी साध्वी हितप्रज्ञा श्रीजी मसा

कुकड़ेश्वर/नीमच। जिले के छोटे से नगर कुकड़ेश्वर निवासी स्वीटी बावेल ने सोमवार को सांसरिक सुख छोड़कर सयंम का पथ अपना लिया है। सूरत में अलसुबह विभिन्न संतों और आचार्य गुणरत्न सूरिश्वर मसा के सानिध्य में उनकी दीक्षा हुई। दीक्षा ग्रहण करने के साथ ही स्वीटी बावेल को नया नाम मिल गया है। अब वे साध्वी हितप्रज्ञा श्रीजी के नाम से पहचानी जाएगी।

6 साल से संतों के सानिध्य में थी स्वीटी बावेल
108 पाश्र्वनाथ में से एक पाश्र्वनाथ जिनालय की नगरी कुकड़ेश्वर निवासी स्वीटी बावेल ने दीक्षा तो अब ली है। लेकिन सयंम के पथ पर चलने का मन उन्होंने सालों पहले बना लिया था। वे करीब छह सालों से संतों के सानिध्य में थी। इस दौरान उन्होंने संतों के सानध्यि में कई स्थानों पर विहार भी किया गया है। स्वीटी बावले ने बीए तक शिक्षा ग्रहण की है।

चतुर्वीदी संघ हुए शामिल, निकला भव्य वरघोड़ा
दीक्षा के पूर्व 21 अप्रैल को स्वीटी बावेल का भव्य वरघोड़ा सूरत में निकला, जिसमें हाथी, घोड़े, शहनाई के साथ ही काफी संख्या में जैन संत और सैंकड़ों की संख्या में जैन समाजजन शामिल रहे। इस आयोजन में कुकड़ेश्वर, सूरत सहित कई प्रांतों के चतुर्विदी संघ शामिल हुए। इस दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।

आचार्य गुणरत्न सूरिश्वर के सानिध्य में हुई 425 वीं दीक्षा
गुजरात के सूरत में कुकड़ेश्वर की बेटी स्वीटी बावेल की दीक्षा अलसुबह ५ बजे हुई। आचार्य गुणरत्न सूरिश्वर के सानिध्य में यह 425 वीं दीक्षा हुई है। दीक्षा आचार्य परम पूज्य पुष्पलता मसा की आज्ञाकारी पुण्य रेखा श्रीजी की शिष्या गुणज्ञरेखा श्रीजी की शिष्या भव्य रेखा श्रीजी मसा के सानिध्य में हुई। इस दीक्षा समारोह में कुकड़ेश्वर सहित सूरत व अन्य क्षेत्रों से काफी समाजजन पहुंचे।

संसार छोड़कर अपनाया संयम का पथ
मानव जीवन तो पुण्य कमाई से मिल जाता है। लेकिन इस जीवन में हम आत्म उत्थान नहीं कर सके तो यह बेकार है। स्वीटी बावेल संसार की परिभ्रमणाओं को छोड़ मोक्ष मार्ग के लिए असार संसार को छोड़ संयम मार्ग को अपना रही है। इस बाला का आत्मा उत्थान की ओर अग्रसर होने को मन आतुर हुआ। तो 22 अप्रैल को सूरत में संयम प्रवज्या अंगीकार करके साध्वी हितप्रज्ञा श्रीजी बन गयी है। यह बात सूरत में दीक्षा दानेश्वरी आचार्य भगवंत गुणरत्न सूरिश्वर मसा ने कही, वे दीक्षा प्रसंग पर विशाल धर्म पांडाल में संबोधित कर रहे थे।