
80 वर्ष पुराने मंशापूर्ण बालाजी।
मुकेश सहारिया, नीमच. जिला मुख्यालय के अंतिम छोर पर स्थित है 80 वर्ष पुराने मंशापूर्ण बालाजी। यहां अर्जी लगाने पर हर मनोकामना पूरी होती है। हर साल हनुमान जन्मोत्सव पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु बालाजी के दर्शन करने पहुंचते हैं।
51 साल पहले छोड़ा था सिंदूर लगा चोला
भक्त मंडल के सदस्य एसके प्रधान, प्रहलाद शर्मा, भरत पाराशर, महंत सीतारामदास महाराज एवं कन्हैयादास महाराज ने बताया कि मंशापूर्ण दरबार दक्षिण मुखी बालाजी का स्थान जूना सत्यनारायण मंदिर परिसर जयसिंहपुरा रोड पर स्थित है जो लगभग 80 वर्ष पुराना है। यहां पर भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। पूर्व में यहां वीरान जंगल था। शैने शैनेे मंदिर का विकास हुआ। नीमच शहर में हनुमान जन्मोत्सव पर सुंदरकांड एवं भंडारे की परंपरा यहीं से प्रारंभ हुई। इसके बाद धीरे धीरे शहर के लगभग सभी हनुमान मंदिरों पर हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाने लगा। सेवादारों ने बताया कि आज से 51 वर्ष पूर्व बालाजी महाराज ने सिंदूर लगा चोला छोड़ा था। जिसका वजन करीब 5 से 6 किलो था। इसके पश्चात कभी भी बालाजी को सिंदूर नहीं लगाया गया। बालाजी द्वारा छोड़ा गया सिंदूरी चोला, यहां के भक्तों द्वारा हरिद्वार गंगाजी में प्रवाहित किया गया था। सेवादारों ने बताया कि वर्षों में एक बार यहां नागराज स्वयं नाग के रूप में पहुंचते हैं। बाद में इंसानी रूप धारण कर बालाजी की पूजा कर लौट जाते हैं। इस घटना को दशरथ काका एवं सागरमल हलवाई द्वारा प्रत्यक्ष देखा जाने का दावा किया गया है, वे अब जीवित नहीं है। हालांकि इस घटना को आज तक कभी किसी ने कैमर में कैद नहीं किया। वर्ष 1991 से मंशापूर्ण दरबार में भक्तों के सहयोग से हनुमान जन्मोत्सव का आयोजन प्रारंभ किया गया। तब से लेकर आज तक यहां हनुमान जन्मोत्सव हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया जाया रहा है। इस दो दिवसीय आयोजन में अखंड रामायण पाठ, बालाजी के दरबार में छप्पन भोग एवं भंडारे का आयोजन होता है। भक्तों द्वारा बताया गया कि ऐसे कई प्रत्यक्ष उदाहरण भी देखे गए हैं जो जीवन में कभी नहीं सोचे थे, वो यहां आकर पूरे हुए। यहां जितने भी धार्मिक आयोजन किए जाते हैं उनमें कभी भी चंदा नहीं जुटाया जाता। बालाजी महाराज की कृपा से सभी आयोजन निर्विध्न रूप से वृहद स्तर पर सम्पन्न हो जाते हैं।
Published on:
15 Apr 2022 09:03 pm
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