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Delhi School Fee Row:दिल्ली के निजी स्कूलों में फीस वृद्धि और नए 'फीस नियमन कानून' (Fee Regulation Law) को लेकर चल रहा विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह कई निजी स्कूलों द्वारा दायर याचिकाओं पर 18 अप्रैल को विस्तार से सुनवाई करेगा। अदालत का लक्ष्य इस जटिल मामले को एक ही बार में पूरी तरह से निपटाना है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे एक शनिवार (18 अप्रैल) को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, ताकि बिना किसी अन्य बाधा के केवल इसी विषय पर चर्चा हो सके।
दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 2025' लागू किया है, जिसे अगस्त 2025 में अधिसूचित किया गया था। इस कानून के तहत स्कूलों को फीस नियंत्रित करने के लिए एक 'स्कूल-स्तरीय शुल्क नियमन समिति' (SLFRC) गठित करना अनिवार्य है।
'एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स' और 'फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स' जैसे संगठनों ने इस कानून को 'दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और मनमाना' बताया है। स्कूलों का दावा है कि यह कानून निजी संस्थानों के प्रबंधन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और बिना सोचे-समझे लागू किया गया है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि शिक्षण संस्थानों को चलाने के अधिकार का मतलब 'मुनाफाखोरी' करना नहीं है।
सरकार के अनुसार, यह कानून शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप बनाया गया है।
नए कानून के तहत हर निजी स्कूल में एक स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) का गठन अनिवार्य होगा, ताकि फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इस समिति में स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय (DoE) का एक नामित सदस्य शामिल होगा। खास बात यह है कि समिति के सदस्यों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाएगा, जिससे किसी प्रकार की पक्षपात या मनमानी की गुंजाइश न रहे। यह कमेटी स्कूल प्रबंधन द्वारा प्रस्तावित फीस संरचना की विस्तार से समीक्षा करेगी और निर्धारित समयसीमा के तहत 30 दिनों के भीतर अपना निर्णय सुनाएगी, जिससे अभिभावकों के हितों की भी सुरक्षा हो सके।
Updated on:
30 Mar 2026 06:19 pm
Published on:
30 Mar 2026 06:19 pm
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