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Chandrashekhar Azad Case: अजीत भारती को दिल्ली HC से अभी राहत नहीं, चंद्रशेखर आजाद पर टिप्पणी मामले में फैसला सुरक्षित

Ajeet Bharti Anticipatory Bail: चंद्रशेखर आजाद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े SC/ST एक्ट मामले में YouTuber अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने कथित टिप्पणी की भाषा और पुलिस जांच से जुड़े सवाल भी उठाए।
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Ajeet Bharti Anticipatory Bail

अजीत भारती को दिल्ली HC से अभी राहत नहीं, फोटो सोर्स- एक्स ( @rohitjain2706 )

Ajeet Bharti News: नागिना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े एससी/एसटी एक्ट के मामले में YouTuber और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि विशेष कानून के प्रावधान लागू होने की स्थिति में टिप्पणी करते समय भारती को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी।

कोर्ट ने पुलिस से पूछा- हिरासत में पूछताछ जरूरी है?

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से यह भी सवाल किया कि अजीत भारती को अब तक कोई नोटिस क्यों नहीं दिया गया और क्या मामले की जांच के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ की जरूरत है। पुलिस की ओर से बताया गया कि जांच अधिकारी को भारती का पता सिर्फ दो दिन पहले मिला था, इसलिए इससे पहले उन्हें नोटिस नहीं दिया जा सका। अदालत ने कथित टिप्पणी की ट्रांसक्रिप्ट में इस्तेमाल कुछ शब्दों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि भाषा आपत्तिजनक थी।

बचाव पक्ष बोला- SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं बनता

अजीत भारती की ओर से पेश वकील जय अनंत देहाद्राई ने दलील दी कि मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध के जरूरी तत्व पूरे नहीं होते। उन्होंने कहा कि केवल किसी अपमानजनक बयान को अपने आप में इस कानून के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। इसके समर्थन में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का भी हवाला दिया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि भारती जातिगत भेदभाव के खिलाफ हैं और उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राय रखी थी। वकील ने अदालत से पूरे वीडियो के संदर्भ को देखने का अनुरोध किया, न कि केवल उस हिस्से को जिसमें कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं।

कोर्ट ने कहा- फिलहाल देखना है प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं

हाई कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर उसका मुख्य सवाल यह देखना है कि मामले में प्रथम दृष्टया (prima facie) अपराध बनता है या नहीं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चंद्रशेखर आजाद या किसी अन्य व्यक्ति की कथित टिप्पणियां, जिनके जवाब में भारती ने बयान देने का दावा किया है, अलग मुद्दा हैं। अदालत फिलहाल भारती की कथित टिप्पणियों और उनके संदर्भ पर विचार कर रही है।

23 अगस्त को दर्ज हुई थी FIR

यह मामला दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू थाने में 23 अगस्त को दर्ज FIR से जुड़ा है। शिकायत आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने दर्ज कराई थी। शिकायत एक वीडियो को लेकर है, जिसे अजीत भारती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वीडियो में चंद्रशेखर आजाद और डॉ. बीआर आंबेडकर को लेकर कथित तौर पर जातिसूचक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।भारती ने इन आरोपों को चुनौती दी है। उनके वकील का कहना है कि कथित टिप्पणियों को उनके परिवार, खासकर उनकी मां और बहन के बारे में पहले की गई कथित टिप्पणियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

पटियाला हाउस कोर्ट ने पहले खारिज की थी याचिका

अजीत भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख तब किया, जब 7 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने माना था कि उसके सामने मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध बनता है और इस मामले में धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर रोक लागू होती है। अब दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सभी की नजर है। कोर्ट ने फिलहाल अग्रिम जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

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