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दिल्ली: एक होटल में वाजपेयी ने दिया था रात्रिभोज, पर ऐसा क्या हुआ कि खाना देख टूट पड़े मुशर्रफ

अटल जी के कुछ ऐसे किस्से जो हमेशा के लिए अमर हो गए और उनके सहज, सरल, शांतचित व्यवहार को बताती हैं। इसी तरह का एक किस्सा है 2001 की।

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दिल्ली: एक होटल में वाजपेयी ने दिया था रात्रिभोज, पर ऐसा क्या हुआ कि खाना देख टूट पड़े मुशर्रफ

दिल्ली: एक होटल में वाजपेयी ने दिया था रात्रिभोज, पर ऐसा क्या हुआ कि खाना देख टूट पड़े मुशर्रफ

नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी यादें युगों-युगों तक हमारे बची जिंदा रहेंगी। अटल जी के कुछ ऐसे किस्से जो हमेशा के लिए अमर हो गए और उनके सहज, सरल, शांतचित व्यवहार को बताती हैं। इसी तरह का एक किस्सा है 2001 की। 2001 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ भारत दौरे पर आए थे। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली के ताज होयल में उनके सम्मान में सात्रिभोज का आयोजन किया था। इस रात्रिभो में देश-विदेश की तमाम जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं।

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भोजन पर टूट पड़े मुशर्रफ

आपको बता दें कि इसके बाद वाजपेयी जी ने निर्देश दिया कि मुंबई के ताज होटल के निदेशक शेफ हेमंत ओबराय को बुलाया जाए। अटल जी ने कहा कि उनके मार्गदर्शन में ही रात्रिभोज के लिए व्यंजन तैयार होंगे। बता दें कि अटल जी खाने-पीने के खासे शौकीन थे और हेमंत ओबराय के पकवानों के मुरीद थे। इस विशेष अवसर पर हेमंत ने सिकंदरी रान, बिरयानी और मलाई कोफ्ता जैसे व्यंजन विशेष रूप से तैयार किए थे। लेकिन इनसबके बीच एक अजीब वाक्या हुआ। दरअसल मांसाहार भोजन के शौकीन परवेज मुशर्ऱफ जैसे ही रात्रि भोज शुरू हुआ खास तौर से तैयार इन व्यंजनों को छोड़ शाकाहारी भोजन खाने लगे।

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मिठाई के शौकीन थे अटल

बता दें कि अटल जी बहुत ही गौर से इन सब घटनाक्रम को देख रहे थे, क्योंकि वे दोनों एक ही टेबल पर खाना खा रहे थे। इस बीच अटल जी ने परवेज मुशर्ऱफ से पूछा कि वे शाकाहार भोजन क्यों कर रह हैं? इस पर मुशर्रफ ने हंसते हुए जवाब दिया कि ये शायद हलाल मांस नहीं है। वाजपेयी जी ने फौरन हेमंत ओबराय को बुलाया और सारी स्थिति को स्पष्ट कर दी। उन्हें बताया कि गोश्त हलाल है। फिर क्या था मुशर्रफ मांसाहार भोजन पर टूट पड़े। बता दें कि वाजपेयी जी हेमंत ओबेराय के इतने बड़े प्रशंसक थे कि वे प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान जब भी विदेशी दौरों पर जाते तो उन्हें अपने साथ अवश्य लेकर जाते थे। अटल जी एक जिंदादिल शख्स थे, जो स्वादिष्ट भोजन खाने-खिलाने में यकीन करते थे। वे मिष्ठान के भी दीवाने थे। उन्हें रसगुल्ला, पिन्नी और पतीसा भी प्रिय था। भोजन करने के बाद मिठाई जरूर खाते थे।

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