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Exclusive: ओडिशा की इन 14 लोकसभा सीटों पर लड़ना चाहती है बीजेपी, बीजेडी से सीटों के समझौते पर जल्द मंथन

Loksabha election 2024: ओडिशा में भाजपा और बीजू जनता दल के बीच गठबंधन हुआ तो किन सीटों पर कौन लड़ सकता है, पढ़िए नवनीत मिश्र की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।      

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प्रधानमंंत्री मोदी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की फाइल फोटो

नई दिल्ली। Loksabha election 2024: 15 साल बाद ओडिशा की सत्ताधारी बीजू जनता दल(BJD) की एनडीए(NDA) का हिस्सा बनने की पटकथा लगभग तैयार हो चुकी है। बीजेपी और बीजेडी के बीच फिलहाल गठबंधन के फॉर्मूले पर मंथन चल रहा है। पत्रिका को उन सीटों के बारे में जानकारी मिली है, जिन पर बीजेपी ने दावा ठोका है। भाजपा ने आठ सिटिंग सांसदों के अलावा 6 अन्य सीटों पर दावेदारी जताई है। ये 6 वो सीटें हैं, जहां पार्टी 2019 में हार भले गई थी, लेकिन उसने सत्ताधारी बीजेडी को टक्कर दी थी।


इन 14 सीटों पर बीजेपी ने ठोका दावा

पुरी
बालासोर
बारगढ़
भुवनेश्वर
बोलंगीर
कालाहांडी
मयूरभंज
संबलपुर
सुंदरगढ़
भद्रक
ढेंकनाल
क्योंझर
बेरहामपुर
केंद्रापड़ा

इन 7 सीटों पर लड़ सकती है बीजेडी

नबरंगपुर
जगतसिंहपुर(एससी)
जाजपुर
कटक
कोरापुट
अस्का
कंधमाल

क्यों भाजपा-बीजेडी दोनों गठबंधन का बना रहीं विचार?

ओडिशा में गठबंधन से भाजपा और बीजद दोनों लाभ देख रहीं हैं। भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी ने जिस तरह से 2024 के लोकसभा में एनडीए के 400 पार और खुद 370 सीटों का बड़ा लक्ष्य तय किया है, उससे ओडिशा जैसे स्विंग स्टेट में गठबंधन जरूरी हो गया है। सूत्रों ने बताया कि ओडिशा में संभावित गठबंधन के चक्कर में ही बीजेपी ने 29 फरवरी को केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बैठक में ओडिशा की सीटों पर विचार नहीं किया था। बीजेडी से संकेत मिलने के बाद ही बीजेपी ने ओडिशा कोर ग्रुप की बुधवार की रात मीटिंग बुलाकर अगले कदम पर विचार किया। वहीं बीजेडी का मानना है कि भाजपा से गठबंधन के कारण ओडिशा में डबल इंजन सरकार होगी, जिससे राज्य को केंद्र से बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी। इससे बीजेडी राज्य की जनता की आकांक्षाओं को कहीं आसानी से पूरी कर सकेगी।

सीट समझौते का यह फार्मूला

सूत्रों ने बताया कि ओडिशा में पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा 14 सीटों पर लड़ाई में रही थी, जिसमें से 8 सीटें जीतने में सफल रही थी। पार्टी लोकसभा चुनाव में बीजेडी से 21 में से पुरी, संबलपुर सहित वही 14 सीटें मांग रही है। बीजेडी इस पर सहमत भी है। लेकिन, बदले मे विधानसभा चुनाव में बीजेडी, बीजेपी को सिर्फ 52 से अधिक सीट देने को तैयार नहीं है। एक नेता ने बताया कि गठबंधन तय हो चुका है, सिर्फ सीटों का समझौता बाकी है।


एनडीए की झोली में आ सकती हैं सभी 21 सीटें

सूत्रों का कहना है कि ओडिशा में भाजपा और बीजेडी का पिछले लोकसभा चुनाव का वोट शेयर मिलाकर देखें तो 80 प्रतिशत होता है। इससे गठबंधन की स्थिति में दोनों दल सभी 21 सीटें जीत सकते हैं। क्योंकि पिछली बार कांग्रेस एकमात्र लोकसभा सीट कोरापुट को महज 3613 वोटों से ही जीत सकी थी। बीजेडी से गठबंधन कर बीजेपी को दोहरा लाभ होगा। एक तरफ भाजपा राज्य की सत्ता में साझेदार बन सकती है। सत्ता में रहकर पार्टी को पूरे राज्य में अपने संगठन का विस्तार करने में आसानी होगी। दूसरी तरफ राज्य की नंबर 1 और नंबर 2 दलों के बीच गठबंधन से लोकसभा की सभी 21 सीटें एनडीए के खाते में आ सकती है। वर्तमान में बीजेडी के पास 12 और बीजेपी के पास 8 लोकसभा सांसद हैं।

भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि डेढ़ दशक पूर्व बीजेपी और बीजेडी सहयोगी रह चुके हैं। दोनों दलों के कार्यकर्ता और मतदाता एक दूसरे के साथ सहज भी रहे हैं। ऐसे में वोट शिफ्ट होने में दिक्कत नहीं आएगी।