"मुझे लगा कि वे प्रदर्शनकारी छात्र हैं, इसलिए मैं शांति से अपनी ड्यूटी के लिए आगे बढ़ता रहा। लेकिन तभी करीब 100 से 150 लोगों का गुट मेरी तरफ लपका। मैं वर्दी में था, फिर भी उन्होंने बिना कुछ सोचे-समझे मुझ पर पत्थरों, लाठियों और धारदार चीजों से हमला बोल दिया। किसी तरह गिरते-पड़ते मैंने वहां से निकलकर अपनी जान बचाई।" - नंद किशोर सिंह, घायल इंस्पेक्टर