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फर्जी मुकदमा और नकली वकील…हनी ट्रैप में फंसाकर सौदेबाजी, रिटायर अफसर को ऐसे बनाया शिकार

Delhi Crime Branch: क्राइम ब्रांच ने एक हाई-प्रोफाइल हनीट्रैप गिरोह को दबोचा है। यह गिरोह भोली-भाली सूरत और मीठी बातों के जाल में लोगों को फंसाता था और फिर रेप का झूठा केस दर्ज कराने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलता था। गिरोह की मुख्य आरोपी महिला और उसका मास्टरमाइंड साथी अब सलाखों के पीछे हैं।

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DelhiCrime Branch:दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने करोड़ों की उगाही करने वाले एक शातिर 'हनीट्रैप सिंडिकेट' का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह की मास्टरमाइंड दरियागंज की 44 वर्षीय महिला और उसका सहयोगी यशदेव सिंह चौहान अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। यह गिरोह रसूखदार लोगों को हुस्न के जाल में फंसाकर उन पर झूठे रेप केस दर्ज कराता था। इस गैंग की हिम्मत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन्होंने एक रिटायर्ड आर्मी अफसर को भी नहीं बख्शा, जिसका मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक जा पहुंचा था।

रिटायर्ड आर्मी अफसर को बनाया शिकार

पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक रिटायर्ड आर्मी कैप्टन से संपर्क साधा। उसने खुद को प्रोफेशनल सर्विस प्रोवाइडर बताकर उनके उपन्यास के प्रमोशन का लालच दिया। इसके बाद पैसों के लेन-देन को लेकर जानबूझकर विवाद पैदा किया गया। महिला ने इसी आधार पर 2021 में मेहरौली थाने में दुष्कर्म और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। आखिर कार मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 25 फरवरी 2025 को अदालत ने इस केस को पूरी तरह निरस्त कर दिया और इसे कानूनी प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग करार दिया।

9 फर्जी एफआईआर का खुलासा

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी महिला ने दिल्ली के अलग-अलग थानों में कुल 9 एफआईआर दर्ज कराईं। इनमें से 3 मामले दुष्कर्म और 6 मामले छेड़छाड़ व धमकी से जुड़े थे। कई पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने आरोपियों के काम करने के तरीके की पुष्टि की है

फर्जी वकील बनकर उगाही का खेल

पुलिस के मुताबिक, महिला का सहयोगी यशदेव सिंह चौहान खुद को वकील बताकर पीड़ितों से संपर्क साधता था, जबकि असलियत में वह कड़कड़डूमा कोर्ट में एक वकील का क्लर्क है। वह कोर्ट केस के नाम पर डराकर मोटी रकम की सौदेबाजी करता था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक मोबाइल और पेन ड्राइव जब्त की है, जिसमें पैसों के लेन-देन और 'सेटलमेंट' से जुड़ी जरूरी ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं। इन साक्ष्यों को फोरेंसिक लैब भेजा गया है और दोनों आरोपियों की आवाज के नमूने भी लिए गए हैं।

कैसे काम करता था गिरोह

पुलिस जांच के अनुसार, यह एक संगठित रैकेट था जिसमें पहले लोगों को हनीट्रैप के जरिए फंसाया जाता था, फिर उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक केस दर्ज कर दबाव बनाया जाता था और बाद में पैसे लेकर समझौता किया जाता था। महिला खुद सीधे पैसे की बात नहीं करती थी, बल्कि अपने सहयोगी के जरिए यह काम कराती थी। फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है।