
दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम विभाग पर ठोका जुर्माना।
Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेक्स टॉय को लेकर उपजे विवाद पर सुनवाई करते हुए सीमा शुल्क विभाग पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। खास बात ये है कि जुर्माने की यह राशि सीमा शुल्क विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर जैनेंद्र जैन के वेतन से काटने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया, क्योंकि विभाग ने सेक्स टॉय और बॉडी मसाजर जैसे उत्पादों के आयात पर स्पष्ट नीति बनाने के निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके अलावा दो कंपनियों से जब्त किए गए माल को छोड़ने का आदेश देने के बाद भी रोके रखा। इस मामले में कस्टम विभाग ने पूर्व में जारी हाई कोर्ट के आदेश की समीक्षा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने विभाग की यह मांग खारिज कर दी।
दरअसल, यह मामला टेक्सिंक (Techsync) और देबंजन इम्पेक्स (Debanjan Impex) नाम की दो कंपनियों से जुड़ा है। दोनों कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि कस्टम विभाग ने उनके माल को सेक्स टॉय बताते हुए रोक लिया है, जबकि पहले कई बार ऐसे ही उत्पादों को बिना किसी आपत्ति के विभाग की क्लियरेंस मिलती रही है। इसके अलावा अन्य कंपनियों के ऐसे ही माल वाली खेप भी पास की गई है। कंपनियों ने कस्टम अधिकारियों पर उन्हें परेशान करने का आरोप लगाया था। गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि विभाग बिना किसी वाजिब कारण के कंपनियों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा है, जबकि उसके पास ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मौजूद थे जो उसकी अपनी दलीलों का खंडन करते थे, लेकिन इन्हें अदालत के सामने पेश नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने पाया कि कस्टम विभाग की समीक्षा याचिका में कोई मजबूत आधार नहीं है। इससे पहले, इसी साल 30 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को निर्देश दिया था कि ऐसे उत्पादों के आयात के लिए एक समान नीति बनाई जाए, जिन्हें बॉडी मसाजर या सेक्स टॉय के रूप में घोषित किया जाता है।
अदालत ने यह भी कहा था कि इस नीति को तैयार करने के लिए संबंधित मंत्रालयों के बीच परामर्श किया जाए। ताकि कस्टम अधिकारियों को भी साफ दिशा-निर्देश मिल सकें और कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। साथ ही, अदालत ने दोनों कंपनियों के जब्त माल को अंतरिम रूप से रिहा करने का भी आदेश दिया था। इसके बावजूद विभाग ने यह कहते हुए आदेश की समीक्षा मांगी कि इन उत्पादों के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अनुमति लेना जरूरी है। विभाग ने यह भी दावा किया कि कंपनियों ने बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2022 के तहत जरूरी विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी (EPR) प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराया।
अदालत ने पाया कि विभाग उन दिशा-निर्देशों का खुलासा ही नहीं कर रहा था जिनसे स्पष्ट होता था कि यह अनुमति या प्रमाणपत्र इस मामले में जरूरी नहीं थे या विभाग की अपनी दलीलें अधूरी थीं। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग ने जानबूझकर तथ्यों को छिपाया और कंपनियों पर दबाव बनाते हुए उन्हें बार-बार परेशान किया। इसलिए समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने सीमा शुल्क विभाग पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना दोनों याचिकाओं के लिए 25-25 हजार रुपये के हिसाब से लगाया गया है।
Published on:
27 Nov 2025 04:40 pm
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