
दिल्ली कार ब्लास्ट मामले के आरोपी की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में खारिज।
Red Fort Blast Case: दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार धमाके से जुड़े मामले में गिरफ्तार आरोपी जसीर बिलाल वानी की याचिका पर शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जसीर बिलाल वानी ने अदालत से मांग की थी कि उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुख्यालय (हेडक्वार्टर) में अपने वकील से मुलाकात की अनुमति दी जाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मांग को मानने से साफ इनकार कर दिया और मामला वापस निचली अदालत को भेज दिया। दरअसल, आरोपी जसीर बिलाल वानी इस समय NIA की दस दिन की हिरासत में है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी की मदद की थी, जिसने लाल किले के पास 12 नवंबर को विस्फोटक सामग्री से भरी कार से धमाका किया था। इस मामले में कई महत्वपूर्ण सुराग सामने आ चुके हैं और एजेंसी आरोपियों के नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
इसी मामले में आरोपी जसीर बिलाल वानी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाकर एनआईए के मुख्यालय में वकील से मुलाकात करने की मांग की थी। आरोपी का तर्क था कि वह निचली अदालत में भी गया था, लेकिन निचली अदालत ने उसकी याचिका मौखिक रूप से खारिज कर दी। इस मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि अदालत स्थापित नियमों और प्रक्रिया के तहत काम करती है और किसी एक आरोपी के लिए अलग या विशेष व्यवस्था नहीं की जा सकती।
जस्टिस शर्मा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जसीर बिलाल वानी के वकील यह साबित नहीं कर सके कि उनकी कानूनी मुलाकात संबंधी आवेदन को निचली अदालत ने पहले खारिज किया था। ऐसे में हाई कोर्ट के समक्ष सीधे इस तरह की मांग पेश नहीं की जा सकती। जस्टिस शर्मा ने कहा "आपको लगता है कि मैं अपनी प्रक्रिया बनाऊंगी? मैं नहीं बनाऊंगी। यह कोई विशेष मामला नहीं है। अदालत पहले की प्रक्रिया ही अपनाएगी।" अदालत ने जसीर बिलाल वानी के वकील द्वारा दिए गए इस बयान पर भी भरोसा करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उनके आवेदन को निचली अदालत ने मौखिक रूप से खारिज कर दिया है।
इस पर जस्टिस शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि हर कोई ऐसे मौखिक दावों के आधार पर हाई कोर्ट में सीधे नहीं आ सकता। उन्होंने कहा "मैं आप पर भरोसा क्यों करूं? कोई भी आकर कह सकता है कि निचली अदालत ने मौखिक रूप से याचिका खारिज की है। अगर हम ऐसे दावों पर भरोसा करने लगें तो हर कोई यही कहकर यहां आएगा। हम एक प्रक्रिया का पालन करते हैं और उसे किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं बदल सकते।"
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया कि पहले निचली अदालत को इस पर निर्णय देना चाहिए। इसके साथ ही याचिका को वापस निचली अदालत भेज दिया गया। अब जसीर बिलाल वानी के वकील को वहीं पर कानूनी मुलाकात की अनुमति संबंधी आवेदन दोबारा दाखिल करना होगा या पूर्व में दाखिल आवेदन पर आदेश प्राप्त करने होंगे। NIA ने अदालत को बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और सुरक्षा कारणों से किसी भी मुलाकात की अनुमति जांच के महत्वपूर्ण चरण में नहीं दी जा सकती। एजेंसी का दावा है कि जसीर बिलाल वानी ने हमलावर को तकनीकी व तार्किक मदद प्रदान की थी और उसके संपर्क आतंकियों के नेटवर्क तक जाते हैं।
जसीर बिलाल वानी कश्मीर का रहने वाला बताया जाता है और प्रारंभिक जांच के अनुसार वह आतंकी मॉड्यूल का सक्रिय सहयोगी था। NIA के अनुसार उसने आत्मघाती हमले की योजना बनाने वाले उमर उन नबी की कई स्तरों पर मदद की, जिसमें डिजिटल संवाद, विस्फोटक सामग्री के प्रबंधन में सहायता और सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था शामिल है। जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि जसीर बिलाल वानी काफी समय से कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में था और हमले को अंजाम तक पहुंचाने में उसकी भूमिका अहम रही। फिलहाल एजेंसी उससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है।
Published on:
21 Nov 2025 07:40 pm
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