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Delhi Hotel Fire: ‘हाथों में प्रेशर कुकर लिए पड़े थे शव’, प्रत्यक्षदर्शी बोले- बच सकती थी कई जानें

Delhi Malviya Nagar Fire: राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल वाली इमारत में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 11 विदेशी नागरिक भी शामिल है।

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Delhi Malviya Nagar fire news

मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हुई (Photo: IANS)

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 11 विदेशी नागरिक भी शामिल है। दिल्ली पुलिस के 10 जवान भी घायल हुए है। इस हादसे के चश्मदीद स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ और जानें बच सकती थी अगर दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंच जातीं। इसके अलावा होटल की इमारत की छत का दरवाजा बंद था, जबकि इमारत की कांच भी नहीं टूट रही थी।

प्रत्यक्षदर्शियों ने कुछ ऐसे वीडियो द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा गया कि जान बचाने के लिए कई लोग तीसरी मंजिल की खिड़कियों से नीचे कूद रहे थे। नीचे मौजूद स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने के लिए गद्दे बिछाए थे। हादसे में कई शव इतनी बुरी तरह झुलस गए थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया, जबकि कई लोगों की मौत दम घुटने के कारण हुई। इमारत का कांच से बना बाहरी हिस्सा भी लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ।

‘कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी’

सबसे पहले राहत कार्य में जुटने वाले लोगों में शामिल मोहम्मद अफजल ने मीडिया से कहा, "जब हम अंदर पहुंचे तो देखा कि आग केवल तीसरी मंजिल तक ही पहुंची थी। हमने कुछ ऐसे लोगों को छत की ओर ले जाने की कोशिश की जो जीवित थे, लेकिन छत का दरवाजा बंद था। हम उन्हें बचा नहीं सके।"

अफजल ने बताया कि इमारत का कांच वाला बाहरी ढांचा भी बचाव कार्य में बड़ी बाधा बना। उन्होंने कहा, "इमारत के बाहरी हिस्से में लगा कांच टूट नहीं रहा था। लोगों को बाहर निकालने के लिए हमने उस पर ईंटें और पत्थर फेंके, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार हमारे एक रिश्तेदार ने लोहे की रॉड लेकर हर मंजिल का कांच तोड़ा, तब कहीं कुछ लोगों के बाहर निकलने का रास्ता बन पाया।"

एक अन्य बचावकर्मी फजल ने बताया, "अंदर हमने देखा कि कई लोगों ने कांच की दीवार तोड़ने के लिए प्रेशर कुकर तक लाया था, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। उन शवों के पास प्रेशर कुकर पड़े मिले।"

स्थानीय दुकानदार अरमान मंसूरी और उनके पिता रियाजुद्दीन मंसूरी ने भी पीड़ितों को बचाने का हरसंभव प्रयास किया। उन्होंने इमारत से नीचे कूद रहे लोगों को बचाने के लिए अपनी दुकान के कम से कम 20 गद्दे निकालकर बिछाए। कई लोग उन पर कूदकर बच गए।

एक और स्थानीय निवासी ने कहा कि लगभग 8:30 बजे इलाके में जलने की गंध आने लगी थी। चिंगारियां निकलने लगीं। पहली चिंगारी करीब 8 बजे दिखी, लेकिन दमकल की गाड़ी 9:40 बजे पहुंची। अगर दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंच जातीं तो जानमाल का नुकसान कम हो सकता था।

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