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QR कोड बताएगा आपके इलाके के निर्माण कार्य का सच, MCD का नया स्मार्ट प्लान… ऐसे करें चेक

Delhi Municipal Corporation: दिल्ली नगर निगम ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई पहल शुरू की है। अब ₹10 लाख से अधिक की लागत वाली हर विकास परियोजना स्थल पर क्यूआर कोड के साथ सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, जिसे स्कैन कर लोग परियोजना की पूरी जानकारी अपने फोन पर देख सकेंगे।

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Delhi Municipal Corporation releases QR code details construction work your area

AI के द्वारा बनाया गया प्रतीकात्मक फोटो

Delhi Municipal Corporation:दिल्ली नगर निगम ने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को सीधे जनता से जोड़ने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नई पहल की शुरूआत की है। दरअसल, महापौर (मेयर) सरदार राजा इकबाल सिंह के निर्देश पर निगम के अभियांत्रिक विभाग ने एक नया फरमान जारी किया है, जिसके तहत ₹10 लाख से अधिक की लागत वाली हर विकास परियोजना स्थल पर सूचना बोर्ड लगाना अब अनिवार्य होगा। उस बोर्ड पर एक क्यूआर कोड लगा होगी जिसको स्कैन करते ही योजना का नाम और कार्य आपके फोन में दिखेगा।

आपको बता दें कि इस नई पहल को लेकर राजा इकबाल सिंह ने बताया कि ठेकेदारों को कार्यस्थल पर 3 गुणा 4 फीट का लोहे का एक बोर्ड लगाना होगा। इस बोर्ड का बैकग्राउंड सफेद रखा जाएगा ताकि जानकारी स्पष्ट रूप से पढ़ी जा सके। इस बोर्ड पर न केवल योजना का नाम होगा, बल्कि यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि पैसा किस मद या बजट योजना से खर्च किया जा रहा है।

बोर्ड पर ये जानकारियां होंगी सार्वजनिक

परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी बोर्ड पर स्पष्ट रूप से दी जाएगी, जिसमें परियोजना का नाम लिखा होगा और उसे पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा तय होगी। इसके साथ ही ठेकेदार का नाम और संबंधित विवरण भी दर्ज रहेगा। निगरानी के लिए निगम के कनिष्ठ अभियंता (JE) और सहायक अभियंता (AE) का नाम व उनके संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। खास बात यह है कि बोर्ड पर एक क्यूआर कोड भी होगा, जिसे स्कैन करते ही परियोजना की पूरी जानकारी मोबाइल पर आसानी से प्राप्त की जा सकेगी।

ठेकेदार उठाएगा खर्च, 'क्वालिटी कंट्रोल' रखेगा नजर

रिपोर्ट के मुताबिक महापौर ने साफ तौर पर बताया है कि इन सूचना बोर्डों को लगाने का पूरा खर्च काम करा रहे ठेकेदार को ही निर्हवन करना पड़ेगा। इसके क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी निगम के क्वालिटी कंट्रोल (गुणवत्ता नियंत्रण) विभाग को सौंपी गई है, जो इसका पूरा रिकॉर्ड रखेगा। वहीं, अगर कोई ठेकेदार इस बोर्ड को लगाने में लापरवाही करता है तो उसे जवाब देना होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही में होगा सुधार

अक्सर देखा जाता है कि स्थानीय नागरिकों को अपने क्षेत्र में चल रहे कार्यों की लागत, समय-सीमा या गुणवत्ता के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। महापौर राजा इकबाल सिंह के मुताबिक, 'इस व्यवस्था से कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी। जब जनता के सामने जेई, एई और ठेकेदार के नंबर होंगे, तो उनकी जवाबदेही खुद-ब-खुद बढ़ जाएगी। इससे कार्यों को समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने में मदद मिलेगी।'