दिल्ली में फर्जी राशन कार्ड का नया खुलासा, मुर्दे भी लेने आ रहे हैं राशन

दिल्ली में फर्जी राशन कार्ड का नया खुलासा, मुर्दे भी लेने आ रहे हैं राशन

Anil Kumar | Publish: Aug, 08 2018 05:10:49 PM (IST) New Delhi, Delhi, India

भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए अरविंद केजरीवाल के नाक के नीचे ही एक बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे से चारों ओर हडकंप मचा हुआ है।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बीते दिनों भूख से एक ही परिवार के तीन बच्चियों की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक चौंकाने वाले खुलासे ने सबको हैरान कर दिया है। भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए अरविंद केजरीवाल के नाक के नीचे ही एक बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे से चारों ओर हडकंप मचा हुआ है। दरअसल खुलासा यह हुआ है कि राजधानी में मुर्दे और गमशुदा व्यक्ति भी सरकारी राशन खा रहे हैं। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि दिल्ली से बाहर जा चुके लोग और शादी कर दूसरे प्रदेशों में जा चुकी लड़कियां भी हर महीने सरकारी राशन खाने दिल्ली आ रही हैं। आपको बता दें कि बीते दिनों सरकारी राशन कार्ड में घोटाले की बात सामने आने के बाद केजरीवाल सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगे थे। हालांकि दिल्ली सरकार ने फौरन कार्रवाई करते हुए करीब 2 लाख राशन कार्डों के जांच के आदेश दिए थे। लेकिन अब इस नए खुलासे से यकीनन केजरीवाल सरकार सवालों के घेरे में है।

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आप विधायक ने सुखबीर सिंह ने किया खुलासा

आपको बता दें कि यह नया खुलासा किसी विपक्षी दल के नेता ने नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के विधायक ने ही किया है। मुंडका से आप विधायक सुखबीर सिंह दलाल ने विशेष उल्लेख नियम 280 के तहत विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल को शिकायत दी है। अपने शिकायत में सुखबीर सिंह ने लिखा है कि 2011 से राशन कार्डों की वस्तुस्थिति जांच का कोई सर्वे नहीं हुआ है। जबकि हर वर्ष हजारों लोगों की मौत हो जाती है। हजारों लड़किया शादी करके हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों में चली जाती हैं। हजारों लोग ऐसे भी हैं, जो रोजगार की तलाश में दिल्ली में आए थे। उन्होंने लिखा कि 2011 में राष्ट्रीय खाद्य योजना के तहत इनके भी राशन कार्ड बने थे, जबकि कुछ वर्ष बाद ही ये लोग दिल्ली छोड़ वापस या किसी और शहर चले गए। सुखबीर सिंह ने कहा कि बीते आट वर्ष में हजारों लोग ईडब्ल्यूएस और बीपीएल की श्रेणी से भी बाहर हो गए हैं, लेकिन उनके राशन कार्ड भी निरस्त नहीं किए गए हैं। लेकिन मौजूदा स्थिति में उन सभी लोगों का नाम दर्ज है। सिंह के मुताबिक दिल्ली में करीब 19 लाख राशन कार्ड हैं। उन्होंने कहा कि औसतन हर कार्ड पर तीन से चार लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इस लिहाज से दिल्ली में करीब 70 से 72 लाख लोग सरकारी राशन का उपभोग कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि फिलहाल उनका कोई सर्वे नहीं हुआ है।

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जांच की मांग

आपको बता दें कि आप विधायक सुखबीर सिंह ने अपने शिकायत में विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि 2011 से 2018 के बीत जितने भी राशन कार्ड बने हैं उनकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि राजधानी में एक विस्तृत सर्वे होना चाहिए। अपने शिकायत में सुखबीर सिंह ने यह कयास लगाया है कि जांच में करीब-करीब चार से पांच लाख लोगों के नाम कट जाएंगे। इससे राशन कार्ड के वितरण में पार्दरशिता आएगी और जरूरतमंद व्यक्ति तक ही राशन पहुंच पाएगा। बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस शिकायत को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को अग्रसारित कर दिया है। अब देखना यह है कि कब तक इस पर जांच होगी और दोषी लाभार्थियों पर कार्रवाई होगी। हालांकि विधायक सुखबीर सिंह का कहना है कि राशन कार्ड जीवन भर के लिए नहीं, बल्कि केवल पांच साल के लिए बनने चाहिए। हर पांच साल बाद उनका नवीनीकरण हो।

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