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Delhi Saket Building Collapse: किराए से हर महीने 10 लाख कमाता था मालिक, नई मंजिलें बनाकर बढ़ाना चाहता था मुनाफा

Saket Metro Station Building Accident: दिल्ली के साकेत के पास सैदुलाजब में ढही इमारत का मालिक करमबीर सेजवाल हर महीने 10 लाख रुपये किराया वसूल रहा था। बेसमेंट में पानी की टंकी के लिए हुई खुदाई और दो अवैध मंजिलों के निर्माण के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।

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Delhi Saket Building Collapse

फोटो सोर्स- IANS

Delhi Saket Building Collapse: साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजब इलाके में शनिवार को ढही चार मंजिला इमारत के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले और बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार मकान मालिक करमबीर सेजवाल इस अवैध इमारत से हर महीने विभिन्न कंपनियों और कॉरपोरेट्स से करीब 10 लाख रुपए का किराया वसूल रहा था। यही नहीं, वह दो और अवैध मंजिलें बनवाकर अपनी कमाई को 5 लाख रुपए और बढ़ाने के लालच में था, जिसने आखिरकार छह लोगों की जान ले ली।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की जांच में पता चला है कि हादसे वाले इलाके में कानूनी नियमों के अनुसार कोई भी इमारत ग्राउंड फ्लोर के अलावा अधिकतम तीन मंजिल से ज्यादा ऊंची नहीं हो सकती। इसके बावजूद, करमबीर सेजवाल अपने एक बिल्डर रिश्तेदार मनीष खत्री के जरिए इमारत के ऊपर दो और अतिरिक्त मंजिलें बनवाने का काम करवा रहा था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बिल्डर मनीष खत्री को करीब तीन महीने पहले इन दोनों अवैध मंजिलों को बनाने का ठेका दिया गया था। खत्री ने आगे इस काम के लिए एक ठेकेदार को लगाया था। पुलिस अब उस ठेकेदार की भी तलाश कर रही है और जरूरत पड़ने पर उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।

8 साल पुरानी इमारत का बेसमेंट नहीं सह पाया वजन

आपको बता दें कि जांच में पता चला है कि इस बहुमंजिला इमारत का निर्माण आठ साल पहले किया गया था। तकनीकी और संरचनात्मक रूप से इस इमारत का बेसमेंट और नींव इतनी मजबूत नहीं थी कि वह पहले से बने ढांचे के ऊपर दो और मंजिलों का भारी-भरकम वजन बर्दाश्त कर सके। सूत्रों के अनुसार, एक अतिरिक्त मंजिल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका था, जबकि दूसरी पर काम चल रहा था। हालांकि, पैसों के भुगतान को लेकर बिल्डर मनीष खत्री और ठेकेदार के बीच हुए विवाद के कारण पिछले कुछ दिनों से निर्माण कार्य रुका हुआ था।

पानी की टंकी के लिए खुदाई बनी काल!

इस घटना को लेकर पुलिस को शक है कि इमारत गिरने की तात्कालिक वजह बेसमेंट में की गई लापरवाही भरी खुदाई हो सकती है। हादसे से महज कुछ ही दिन पहले इमारत के बेसमेंट में पानी की एक बड़ी टंकी लगाने के लिए खुदाई का काम किया गया था। पुलिस का मानना है कि इस खुदाई की वजह से आठ साल पुरानी कमजोर पड़ चुकी इमारत की नींव पूरी तरह हिल गई और वह भरभराकर ढह गई।

2.5 लाख तक था एक फ्लोर का किराया

इस हादसे के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार को उन सभी कंपनियों और ऑफिस मालिकों को कानूनी नोटिस जारी किया है, जो इस इमारत में काम कर रहे थे। उनसे मकान मालिक सेजवाल के साथ हुए रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा) और अन्य संबंधित दस्तावेज तुरंत जमा करने को कहा गया है। जांच में पता चला है कि इमारत के ग्राउंड, फर्स्ट और थर्ड फ्लोर पर ऑफिस संचालित हो रहे थे, जबकि सेकेंड फ्लोर पिछले कुछ महीनों से खाली था। यहां चल रहे प्रत्येक ऑफिस से सेजवाल को हर महीने 2 लाख से 2.5 लाख रुपए तक का किराया मिलता था।

बिल्डर रिश्तेदार फरार, पुलिस की छापेमारी जारी

हादसे के मुख्य आरोपी मकान मालिक करमबीर सेजवाल को पुलिस ने सोमवार को ही दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के वसंत कुंज स्थित ग्रीन एवेन्यू फार्महाउस से गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, उसका बिल्डर रिश्तेदार मनीष खत्री, जो नेब सराय में अपने परिवार के साथ रहता है, हादसे के बाद से ही फरार है। पुलिस की टीमों ने उसके घर पर छापेमारी की है, लेकिन उसका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।