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दिल्ली में संजय झील में सैकड़ों मछलियों की मौत, हीटवेव और घटते ऑक्सीजन स्तर से संकट गहराया

Sanjay Lake Fish Deaths: पूर्वी दिल्ली की 187 एकड़ में फैली संजय झील का पानी सूखने और ऑक्सीजन खत्म होने से सैकड़ों गंबूशिया, तिलापिया और कार्प मछलियां मृत पाई गईं। एनजीटी की पुरानी चेतावनियों को नजरअंदाज करने और दिल्ली जल बोर्ड की पाइपलाइन में लीकेज के चलते यह जल निकाय अब जलीय जीवों के लिए काल बन चुका है।
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नई दिल्ली

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Pooja Gite

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Updated: 22 May 2026, 1:33 PM IST

Sanjay Lake Fish Deaths

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Delhi Heatwave: दिल्ली में लगातार बढ़ रहे पारे और भीषण लू के बीच पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी के संजय झील से एक बेहद परेशान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। गुरुवार को यहां उथले और हरे पानी में सैकड़ों मछलियां मृत पाई गईं। झील का एक बड़ा हिस्सा सूखकर चटक चुका है और बत्तखें काले कीचड़ के बीच रहने को मजबूर हैं। मरने वाली मछलियों में छोटी गंबूशिया मॉस्किटोफिश से लेकर बड़ी तिलापिया और कार्प जैसी मीठे पानी की प्रजातियां शामिल हैं।

पाइपलाइन में लीकेज और ऑक्सीजन की कमी बड़ी वजह

अधिकारियों के मुताबिक, इस संकट की दो मुख्य वजहें हैं। पहली, कोंडली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से झील को साफ पानी देने वाली मुख्य पाइपलाइन में रिसाव लीकेज होना, जिसकी मरम्मत चल रही है। दूसरी वजह लगातार पड़ रही भीषण गर्मी है, जिसने ठहरे हुए पानी में ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम कर दिया। दिल्ली विकास प्राधिकरण, जो इस 187 एकड़ की झील के एक बड़े हिस्से का रख-रखाव करता है, उसने बताया कि झील में पानी का स्तर बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड की है। जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पाइपलाइन की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है।

एनजीटी की पुरानी चेतावनी हुई सच

इस घटना ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की 2022 की उस रिपोर्ट को फिर याद दिला दिया है, जिसमें कहा गया था कि गाजीपुर लैंडफिल के पास होने के कारण संजय झील के पानी में केमिकल ऑक्सीजन डिमांड बहुत ज्यादा है। इसका सीधा मतलब है कि पानी में प्रदूषण का बोझ ज्यादा है, जिससे जलीय जीवों का दम घुटने लगता है।

एक्सपर्ट्स बोले- सिर्फ मौसम नहीं, सरकारी एजेंसियां भी जिम्मेदार

यमुना और जल निकायों के विशेषज्ञ भीम सिंह रावत ने बताया कि पिछले एक महीने में दिल्ली के कई इलाकों जैसे साहिबी नदी और नजफगढ़ नाला में बड़े पैमाने पर मछलियां मरी हैं। उन्होंने कहा सिर्फ बढ़ते तापमान को दोष देना ठीक नहीं है। ताजे पानी का बहाव बनाए रखने और प्रदूषण रोकने में सरकारी एजेंसियां पूरी तरह नाकाम रही हैं।

वन्यजीव उत्साही यतिन वर्मा ने भी चिंता जताते हुए कहा कि इस साल मछलियों के मरने का पैमाना बहुत बड़ा है। यह प्रदूषित पानी न सिर्फ मछलियों, बल्कि उन पर निर्भर पक्षियों और जमीन के नीचे के पानी को भी नुकसान पहुंचा रहा है। डीपीसीसी की हालिया रिपोर्ट भी बताती है कि दिल्ली के कई जल निकायों में ऑक्सीजन का स्तर शून्य तक पहुंच गया है।

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