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तिहाड़ जेल की महिला कैदी बनाएंगी साड़ियां व सूती कपड़े

- जैन संत की प्रेरणा से स्थापित हथकरघा इकाई का उपराज्यपाल ने किया उद्घाटन

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तिहाड़ जेल की महिला कैदी बनाएंगी साड़ियां व सूती कपड़े

तिहाड़ जेल की महिला कैदी बनाएंगी साड़ियां व सूती कपड़े

नई दिल्ली। तिहाड़ जेल में बंद महिला कैदी अब महिलाओं के लिए साड़ियां, दुपट्टे, स्कार्फ व अन्य सूती कपड़े तैयार करेंगी। महिला बंदियों हथकरघा व हस्तशिल्प का कौशल विकास प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलम्बी बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए प्रमुख दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा से तिहाड़ की महिला जेल संख्या-छह में स्थापित हथकरघा इकाई का गुरुवार को दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उद्घाटन किया।

तिहाड़ जेल प्रशासन ने आचार्य विद्यासागर की प्रेरणा से संचालित महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र जबलपुर के साथ हुए समझौते के तहत यह इकाई स्थापित की है। संगठन दिल्ली की जेलों में महिला कैदियों को हथकरघा व हस्तशिल्प क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण देने के साथ रिहाई के बाद इन्हें रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा। महिला बंदियों के हाथ से बने कपड़े के उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था भी संस्था की ओर से की जाएगी।

चल चरखा महिला प्रशिक्षण व रोजगार केंद्र ने देश की विभिन्न जेलों में 18 पावरलूम इकाइयां स्थापित कर रखी हैं। तिहाड़ जेल में स्थापित हथकरघा इकाई में लगे चरखे में हस्त संचालित उपकरणों का उपयोग ही किया जा रहा है। कपास से सूत निकालने, कपड़ा बुनने की प्रक्रिया पूरी तरह हस्तचालित है।

उपराज्यपाल सक्सेना ने इस मौके कहा कि जब लोग महिलाओं की ओर से तैयार इकॉ फ्रेंडली उत्पाद खरीदना शुरू कर देंगे तो महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिल सकेगा। इस अवसर पर सक्सेना ने संगीत कक्ष व एफएम रेडियो तथा वृद्धावस्था प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया।

तिहाड़ जेल के महानिदेशक संजय बेनिवाल ने कहा कि महिला कैदियों के उत्थान के लिए ये प्रयास वित्तीय सहायता के साथ प्रशिक्षित कैदियों का पुनर्वास सुनिश्चित करेंगे। साथ ही यह पहल रिहाई के बाद कैदियों के पुनर्वास के लिए दिल्ली की जेलों के प्रयासों में नया अध्याय जोड़ेगी।