
नकली शादी ट्रेंड। (Photo : Gemini)
Fake Wedding: बैंड बाजा और शहनाई की धुन पर थिरकते लोग, बारात के स्वागत में जुटे वेटर और सजावट से खचाखच भरा हॉल…अगर कुछ नहीं है तो वो हैं दूल्हा और दुल्हन। आपको ये किसी फिल्म की स्क्रिप्ट लगेगी, लेकिन ये सच है। दरअसल, देश के बड़े शहरों में आजकल जेन-जी (Generation Z) की युवा पीढ़ी में एक नया और अनोखा ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। वो है (Mock Wedding) ‘नकली शादी’। यह एक ऐसी पार्टी है, जिसमें सब कुछ असली शादी जैसा होता है, बस शादी नहीं होती। मेहमान पारंपरिक कपड़ों में आते हैं, स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं और बॉलीवुड के गानों पर रात भर झूमकर नाचते हैं। यह ट्रेंड अब भारत के बड़े शहरों में खूब चर्चा में है।
युवाओं के लिए नकली शादी का यह ट्रेंड एक नए तरह का जश्न है। यह असली शादी के वित्तीय, सामाजिक और भावनात्मक दबावों से दूर सिर्फ़ मौज-मस्ती का मौका देता है। पीआर फर्म में काम करने वाली शिवांगी सिन्हा बताती हैं "हमारी पीढ़ी कानूनी या धार्मिक रिवाजों से ज्यादा यादगार अनुभव बनाने में दिलचस्पी रखती है। नकली शादी में हम बिना किसी चिंता के सिर्फ डांस, खाना और तस्वीरें लेने पर ध्यान दे सकते हैं।"
वित्तीय क्षेत्र में काम करने वाली आरुषि पवार दो ऐसी पार्टियों में शामिल हो चुकी हैं। आरुषि ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया "मुझे लगा था कि यह सिर्फ एक सामान्य पार्टी होगी, लेकिन यह भारतीय कपड़े पहनने, दोस्तों के साथ नाचने और अच्छा खाना खाने का शानदार बहाना है।" वह यह भी बताती हैं कि युवा लड़कियों पर शादी करने का सामाजिक दबाव बहुत ज्यादा होता है और यह ट्रेंड उन्हें उस दबाव से आजादी देता है।
नकली शादी पार्टियों का टिकट या एंट्री फीस आमतौर पर 1,500 से 2,000 रुपये होती है। जेन-जी के ज्यादातर लोग इस कीमत को वाजिब मानते हैं। यानी किसी भी बड़े शहर में प्रीमियम क्लब या कैफे की यही दर होती है। ये लोग बिना किसी अनोखी थीम के भी इतना ही पैसा लेते हैं। युवाओं को इतने में अच्छा खाना और शराब के साथ पार्टी करना सही लगता है, क्योंकि दोस्त के साथ कॉफी डेट पर भी इतना खर्च हो जाता है।
नकली शादी का यह फॉर्मेट इसलिए सफल हुआ है क्योंकि यह शादी के उन मजेदार पहलुओं को लेता है, जिनसे युवा जुड़ सकते हैं और भावनात्मक और सामाजिक बोझ को हटा देता है। यह भारत में उत्सवों के प्रति बिना किसी दबाव के लोगों के प्यार को दर्शाता है।
वेडिंगसूत्र के सीईओ पार्थिप त्यागराजन बताते हैं कि यह ट्रेंड एक डूबने वाला (immersive) अनुभव देता है। यहां आप सिर्फ मेहमान नहीं, बल्कि ‘लड़कीवाले’, ‘लड़केवाले’, या ‘जूता चुराने वाला दस्ता’ भी बन सकते हैं। सब कुछ असली शादी जैसा रंगीन और जीवंत होता है, बस रस्में नहीं होतीं।
विशेषज्ञ इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि यह चलन लंबे समय तक चलेगा या नहीं। हालांकि, उनका मानना है कि यह ऑफ-सीजन महीनों में फल-फूल सकता है। आयोजकों के लिए यह एक अच्छा तरीका है अपने इवेंट स्पेस और सेवाओं को मज़ेदार माहौल में दिखाने का। जनरेशन Z को इंस्टाग्राम-योग्य और अनोखे अनुभव पसंद होते हैं जो इस चलन को बढ़ावा दे रहे हैं। जो युवा अपने घर से दूर रहते हैं। वो इसे सामान्य बार या कैफे के माहौल से अलग रूप में देखते हैं।
Published on:
15 Aug 2025 04:50 pm
