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मिशन शक्ति में मनचाही ‘लड़की’ को बना दिया थाना प्रभारी, पोल खुली तो FIR के आदेश

Mission Shakti Campaign: दिल्ली से सटे गाजियाबाद के पुलिस-प्रशासन में उस समय हड़कंप मच गया, जब ट्रॉनिका सिटी थाने में SHO द्वारा छात्रा की जगह मनचाही लड़की को एक दिन की थाना प्रभारी बनाने का मामला सामने आया।

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Ghaziabad Techno City SHO appointed desired girl as in-charge in Mission Shakti campaign

मिशन शक्ति अभियान (प्रतीकात्मक फोटो)

Mission Shakti Campaign: गाजियाबाद में उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान ‘मिशन शक्ति’ के तहत एक छात्रा को एक दिन का थाना प्रभारी बनाए जाने में गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि ट्रॉनिका सिटी थाने के प्रभारी ने अपने निजी संबंधों को प्राथमिकता देते हुए उस युवती को एक दिन की थानाध्यक्ष बना दिया, जो बताए गए स्कूल की छात्रा ही नहीं थी। मामला सामने आते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अब आरोपी थाना प्रभारी पर मुकदमा दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा का खुलासा?

प्रदेश में 22 सितंबर से ऑपरेशन मिशन शक्ति 5.0 की शुरुआत की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वालंबन को बढ़ावा देना, साथ ही उन्हें अपराधों से बचाव और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। इसी क्रम में 25 सितंबर को गाजियाबाद कमिश्नरेट के सभी थानों में स्कूली छात्राओं को 'एक दिन की थाना प्रभारी' बनाया गया। ताकि छात्राओं में पुलिस व्यवस्था की समझ विकसित हो सके, लेकिन ट्रॉनिका सिटी थाने में यह कार्यक्रम विवादों में आ गया। यहां जिस छात्रा गायत्री सिंह को एक दिन की थानाध्यक्ष बताया गया, वह संबंधित स्कूल होली चाइल्ड एकेडमी की छात्रा ही नहीं निकली, बल्कि वो थाना प्रभारी के एक जानने वाले की बेटी थी।

स्कूल प्रशासन ने खोली पोल

इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने पूरे जिले में एक दिन की थाना प्रभारी बनाई गई छात्राओं और उनके स्कूलों के नाम जारी किए तो उसमें ट्रॉनिका सिटी थाने में SHO बनाई गई गायत्री सिंह होली चाइल्ड स्कूल की छात्रा बताई गई, लेकिन सूची स्कूल प्रशासन ने देखी तो तुरंत इसका खंडन किया। होली चाइल्ड एकेडमी के प्रतिनिधि अशोक कुमार ने HT को बताया कि गायत्री सिंह उनके स्कूल की छात्रा नहीं है।

उन्होंने बताया कि गायत्री के पिता का स्कूल में आना-जाना रहता है और उसी संबंध का लाभ उठाकर उन्होंने अपनी बेटी को थाने ले जाकर स्कूली छात्राओं के साथ शामिल कर दिया। आश्चर्यजनक रूप से थाना प्रभारी ने स्कूल से अनुमति या सत्यापन किए बिना गायत्री सिंह को 'स्कूली छात्रा' बताकर एक दिन का थानाध्यक्ष बना दिया।

जांच के आदेश, जिम्मेदारी तय होगी

मामले के सामने आने के बाद पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत जांच के आदेश जारी किए। डीसीपी ग्रामीण के निर्देश पर एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने जांच अपने हाथ में ले ली है। उन्होंने बताया कि यह मामला कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद उच्चाधिकारियों ने गंभीरता से संज्ञान लिया। जांच में जो तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर रिपोर्ट तैयार कर डीसीपी ग्रामीण और पुलिस कमिश्नर को भेजी जाएगी।

महिला आयोग ने भी जताई नाराजगी

उधर, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य डॉ. हिमानी अग्रवाल ने भी मामले को गंभीर बताया है। गुरुवार को सिहानी गेट स्थित मिशन शक्ति केंद्र के निरीक्षण के दौरान जब उनसे मीडिया ने इस प्रकरण पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह मिशन शक्ति जैसे सशक्तिकरण अभियान की भावना के विपरीत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय पर वह पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखेंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगी।

मिशन शक्ति की मंशा पर सवाल

यह मामला न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मिशन शक्ति जैसे महत्वाकांक्षी अभियान की मंशा पर भी धब्बा लगाता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ पुलिस कमिश्नरेट क्या कार्रवाई करता है। प्रशासनिक स्तर पर यह मामला मिशन शक्ति अभियान के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन गया है।


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