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भगवान माफ करेंगे.. मेट्रो स्टेशन के लिए ले सकेंगे मंदिर की भूमि

मद्रास हाईकोर्ट : मौलिक अधिकार का हनन नहीं

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चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि विकास कार्यों के लिए मंदिर की जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लाखों लोगों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाओं पर भगवान भी कृपा करेंगे। जस्टिस एन.आनंद वेंकटेश ने चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (सीएमआरएल) को मेट्रो स्टेशन स्थापित करने के लिए दो हिंदू मंदिरों की जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी। जस्टिस वेंकटेश ने कहा कि विकास कार्यों के लिए धार्मिक संस्थाओं का अधिग्रहण संविधान के अनुच्छेद 25 या 26 की तहत दिए गए किसी भी मौलिक अधिकार का हनन नहीं है। सीएमआरएल ने मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए दो मंदिरों की भूमि का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव रखा था। भक्तों ने भूमि अधिग्रहण को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की। सीएमआरएल ने एकल पीठ को बताया कि वह उस क्षेत्र के दूसरी ओर भूमि का अधिग्रहण कर सकता है, जिसमें यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का मुख्यालय है। इसे इंश्योरेंस कंपनी ने चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी की जमीन को लेकर जारी अधिग्रहण का नोटिस रद्द करने के आदेश दिए।

विवेकानंद को सही अर्थों में समझा जाए

जस्टिस वेंकटेश ने सुनवाई के दौरान स्वामी विवेकानंद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने कहा था कि धर्म का सर्वोच्च उद्देश्य मानव जाति को एकजुट करना और मानवता की सेवा करना है। ऐसे में हमें उनके शब्दों को सही अर्थों में समझने की जरूरत है।