
सीएम नायब सिंह सैनी, ANI फोटो
IDFC Bank Fraud Case: हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। ₹590 करोड़ के आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी मामले में नाम सामने आने के बाद दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों प्रदीप कुमार-I (2011 बैच) और राम कुमार सिंह (2012 बैच) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सरकार की इस 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत की गई कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि पैसों की हेराफेरी करने वाले किसी भी अधिकारी को छोड़ा नहीं जाएगा।
प्रदीप कुमार-I वर्तमान में हरियाणा राज्य परिवहन विभाग में निदेशक और विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे। वहीं, राम कुमार सिंह राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव, और साथ ही पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Addl. CEO) का दोहरा प्रभार संभाल रहे थे।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का जारी यह आदेश 'अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969' के तहत लागू किया गया है। हालांकि आधिकारिक आदेश में निलंबन के किसी विशेष कारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में इसे IDFC First Bank से जुड़े ₹590 करोड़ के बड़े घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। चूंकि इस मामले की गहन जांच अभी जारी है, इसलिए राज्य सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है ताकि जांच की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी प्रभाव के आगे बढ़ सके।
निलंबन की अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों के लिए कड़ी शर्तें निर्धारित की गई हैं। अब उनका मुख्यालय चंडीगढ़ स्थित मुख्य सचिव कार्यालय (सेवाएं-I शाखा) होगा। उन्हें सरकार की लिखित अनुमति के बिना अपना मुख्यालय छोड़ने की मनाही है। निलंबन अवधि के दौरान, उन्हें केवल निर्वाह भत्ता ही मिलेगा।
सरकार ने इस कार्रवाई की जानकारी केंद्र सरकार के संबंधित विभाग (DoPT) और महालेखाकार को आधिकारिक तौर पर दे दी है। अब संबंधित विभाग इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेंगे। इस जांच की जो भी रिपोर्ट आएगी, उसी के आधार पर यह तय किया जाएगा कि इन अधिकारियों पर आगे कौन सी सख्त कानूनी कार्रवाई या अनुशासनात्मक कदम उठाए जाने हैं।
यह कार्रवाई साफ करती है कि हरियाणा सरकार प्रशासन में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए पूरी तरह गंभीर है। दो आईएएस अधिकारियों का निलंबन भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को और मजबूत करता है। पिछले कुछ महीनों में बैंक धोखाधड़ी के कई बड़े मामले उजागर हुए हैं, जिनकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ACB कर रहा है। सरकार के इस सख्त कदम से यह साफ संदेश गया है कि जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाले किसी भी अधिकारी को, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि यह निलंबन इसलिए लागू किया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच पर कोई आंच न आए और इस तरह सच सामने आ सके। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोनों अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। वहीं इस घटना ने हरियाणा के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है।
Published on:
09 Apr 2026 05:59 pm
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
