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‘हरीश राणा को महसूस न हो कि जानबूझकर…,’ AIIMS की डॉक्टर का ताजा बयान, कहा- उसे किसी तरह की पीड़ा न हो

Harish Rana: सुप्रीम कोर्ट के पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) पर ऐतिहासिक फैसले पर एम्स की पूर्व विशेषज्ञ डॉ. सुषमा भटनागर ने महत्वपूर्ण राय दी है। उन्होंने कहा कि लाइलाज बीमारी के अंतिम चरण में मशीनी जीवन के बजाय मरीज की पीड़ा कम करना और उसे गरिमापूर्ण विदाई देना अनिवार्य है

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Latest statement of AIIMS doctor regarding Harish Rana euthanasia

Harish Rana:सुप्रीम कोर्ट के पैसिव यूथेनेशिया पर दिए गए ऐतिहासिक फैसले पर एम्स (AIIMS) की पूर्व विशेषज्ञ डॉ. सुषमा भटनागर ने अपनी राय साझा की है। उन्होंने कहा कि अंतिम अवस्था के मरीजों के लिए मशीनी इलाज से ज्यादा उनकी पीड़ा कम करना और उन्हें गरिमापूर्ण विदाई देना जरूरी है। भारत सरकार की गाइडलाइंस के तहत लाइफ-सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया को बेहद संवेदनशील और मानवीय बनाने पर जोर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु का एक रूप) को पहली बार अनुमति दिए जाने पर विशेषज्ञों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। एम्स AIIMS दिल्ली की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा भटनागर ने इस फैसले पर कहा कि जब कोई बीमारी अपनी आखिरी और सबसे गंभीर स्थिति में पहुंच जाती है, जहां जीवन का अंत निश्चित हो जाता है, तब इलाज से ज्यादा जरूरी मरीज की पीड़ा को कम करना होता है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे कठिन समय में मरीज को केवल मशीनों के सहारे रखने के बजाय, उन्हें भावनात्मक सहारा देना और उनके अंतिम समय को कष्टमुक्त बनाना सबसे जरूरी है।

डॉ. भटनागर ने बताया कि भारत सरकार के पास लाइफ-सपोर्ट को रोकने या हटाने से जुड़ी स्पष्ट गाइडलाइंस मौजूद हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति में लाइफ-सपोर्ट हटाने का फैसला लिया जाता है, तो उसे पूरी तरह संतुलित और संवेदनशील तरीके से किया जाना जरूरी है, ताकि यह महसूस न हो कि किसी की जान जानबूझकर ली जा रही है, बल्कि मरीज को गरिमा के साथ अंतिम समय तक जरूरी देखभाल और समर्थन मिलता रहे।