
दिल्ली में IAS कोचिंग सेंटर हादसे में अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी।
IAS Coaching Centre Death Case: दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने राजेंद्र नगर के राव आईएएस स्टडी सर्कल में हुए दर्दनाक हादसे के मामले में दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) के दो अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दे दी है। पिछले साल जुलाई में इस कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में बारिश का पानी भरने से तीन आईएएस अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी। राजनिवास की ओर से जारी की गई जानकारी के अनुसार, दोनों अफसरों पर "ड्यूटी में गंभीर लापरवाही" और "तथ्यों को छिपाने" का आरोप है। इस हादसे के बाद दोनों 'ग्रुप-ए' अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। अब एलजी ने उनके खिलाफ सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स, 1965 के तहत कार्रवाई की औपचारिक मंजूरी दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उपराज्यपाल ने साथ ही डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस (DoV) को निर्देश दिया है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए।
यह हादसा 27 जुलाई 2024 को दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके में स्थित राव आईएएस स्टडी सर्कल के बेसमेंट में हुआ था। भारी बारिश के दौरान बेसमेंट में पानी भर गया था, जहाँ कोचिंग सेंटर की लाइब्रेरी चलाई जा रही थी। पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण तीन छात्र अंदर ही फँस गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था और इसने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद डीएम ने विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें दोनों फायर अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर लापरवाही की पुष्टि हुई थी। इस आधार पर पिछले साल ही एलजी ने दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।
जांच में पता चला कि दिल्ली फायर सर्विस के दोनों अधिकारियों ने 1 जुलाई 2024 को संस्थान का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि बेसमेंट को अवैध रूप से लाइब्रेरी और मीटिंग रूम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो फायर सेफ्टी मानकों का उल्लंघन था। इसके बावजूद दोनों अधिकारियों ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने की सिफारिश कर दी। अधिकारियों की सिफारिश के आधार पर 9 जुलाई 2024 को डीएफएस ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया। आरोप है कि दोनों अफसरों ने बेसमेंट के गलत उपयोग से जुड़ी जानकारी को छिपाया और इस मामले को उच्च स्तर पर भेजने के बजाय खुद ही मंजूरी दे दी।
सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स, 1965 यानी CCS (CCA) नियम प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। यह रूल्स केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अनुशासन और सेवा नियम तय करते हैं। इन नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों का वर्गीकरण किया जाता है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तय होती है। साथ ही किसी सजा या कार्रवाई के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी इन्हीं नियमों के तहत दिया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में अनुशासन बनाए रखना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि हर कर्मचारी के साथ निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से न्याय हो।
अब उपराज्यपाल ने औपचारिक रूप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है। अब दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) प्रक्रिया पूरी होगी। इसके तहत निलंबित अधिकारियों को औपचारिक चार्जशीट (आरोप पत्र) दी जाएगी। इसमें उनपर लगे आरोपों का पूरा ब्यौरा होगा। अधिकारियों से लिखित जवाब मांगा जाएगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो एक जांच अधिकारी और प्रस्तुत अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई करेंगे।
जांच पूरी होने के बाद जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट अनुशासनिक प्राधिकरण को सौंपेगा। अगर अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उन पर सजा तय की जाएगी। इसमें वेतनवृद्धि या पदोन्नति रोकने से लेकर पदावनति और सेवा से हटाना यानी बर्खास्तगी तक का प्रावधान है। पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पारदर्शी ढंग से पूरी की जाती है और अंत में अधिकारी को अपील का अधिकार भी रहता है।
Published on:
08 Nov 2025 03:13 pm
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