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गलती पर गलती, ऊपर से ‘स्मार्ट डोर’ भी! कैसे 21 लोगों के लिए काल बना मालवीय नगर का होटल फायर

इस पूरी दुर्घटना में होटल की बनावट ने आग को और अधिक जानलेवा बनाने का काम किया। जांच में सामने आया है कि इमारत में आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था। जब बेसमेंट में आग भड़की, तो कुछ ही मिनटों में धुआं सीढ़ी के रास्ते पूरी इमारत में फैल गया। इसके चलते ऊपरी मंजिलों पर ठहरे मेहमानों के लिए नीचे उतरने का एकमात्र रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।

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Delhi Malviya Nagar fire agrawal family death

दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में बड़ा खुलासा (Photo: IANS)

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट में बुधवार सुबह को लगी भीषण आग में 21 लोगों की दर्दनाक मौत और 26 अन्य के घायल होने के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आई हैं, जिनके कारण यह हादसा और भी घातक बन गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि आग लगने के दौरान बिजली आपूर्ति बंद होते ही होटल के इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया, जिससे मेहमान कमरों और इमारत के भीतर ही फंस गए।

बिजली गुल होते ही बंद हो गया मुख्य गेट

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि होटल में आग लगने के बाद बिजली चली गई, जिससे होटल का मुख्य प्रवेश द्वार जाम हो गया, क्योंकि वह पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से संचालित होता था। जिससे बचकर भागने की कोशिश करने वाले लोग मुख्य गेट के पास आकर भी नहीं बच सके। जबकि बिजली गुल होने से चाबी वाले कार्ड (Key-Card) से चलने वाले कमरों के दरवाजे भी ब्लॉक हो गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात 11 बजे के बाद मुख्य गेट बंद कर दिया जाता था। होटल कर्मचारी कंट्रोल बटन के जरिए इस गेट को संचालित करते थे, लेकिन आग और बिजली गुल होने के कारण सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। इससे लोग अंदर ही फंस गए। साथ ही बाहर से एक अतिरिक्त लोहे की जाली वाला गेट भी बंद था। आग लगने के बाद बचाव दल को इन दोनों अवरोधों को तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा।

एक ही रास्ता था, वही धुएं से भर गया

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था। किसी भी मंजिल पर आपातकालीन निकास की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी।

जांच में सामने आया है कि आग बेसमेंट में सबसे पहले लगी थी। इसके बाद धुआं तेजी से सीढ़ियों के जरिए ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया और वही सीढ़ियां मेहमानों के लिए बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता थीं। देखते ही देखते पूरा होटल धुएं से भर गया और लोग अंदर फंस गए।

सीलबंद खिड़कियां बनीं मौत का कारण

स्थानीय निवासियों ने बताया कि होटल की अधिकांश खिड़कियां पूरी तरह सीलबंद थीं और भवन का बाहरी हिस्सा भी न टूटने वाले मोटे कांच से बना था। इसके कारण धुएं के बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला और इमारत के अंदर दमघोंटू स्थिति पैदा हो गई।

अंदर फंसे पीड़ितों ने इमारत का शीशा तोड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हो सके। कई शवों के पास भारी धातु की वस्तुएं मिलीं, जिनके बारे में माना जाता है कि शीशा तोड़ने में उनका इस्तेमाल किया गया था।

नियमों की अनदेखी ने छीनी 21 जिंदगियां

प्रारंभिक जांच में होटल संचालन से जुड़े कई नियमों के उल्लंघन सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस होटल को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन वहां कथित तौर पर 25 कमरे बनाए गए थे। इसके अलावा इमारत में कई जरूरी अग्नि सुरक्षा उपकरण भी मौजूद नहीं थे। जांच में पाया गया कि होटल में स्मोक डिटेक्टर, ऑटोमैटिक फायर अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर सिस्टम तक नहीं लगे थे। इन सुरक्षा उपायों की अनुपस्थिति ने हादसे को और भयावह बना दिया।

होटल मालिक गिरफ्तार, गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज

जांच एजेंसियों को आशंका है कि बेसमेंट में रखे एलपीजी सिलेंडर और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैली। जानकारी के अनुसार, भवन के ग्राउंड फ्लोर पर एक रेस्तरां संचालित हो रहा था, जबकि उसका किचन बेसमेंट में चलाया जा रहा था।

हादसे के बाद पुलिस ने होटल के मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस और फायर विभाग की संयुक्त जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।