
जहरीली ओजोन गैस का बढ़ता स्तर बना बड़ी चुनौती
Ozone Levels in Delhi: दिल्ली की जहरीली हवा इन दिनों ऊपरी तौर पर भले ही साफ नजर आ रही हो, लेकिन यह एक बड़ी और गंभीर समस्या को छिपा रही है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां पिछले कुछ वर्षों में राजधानी में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के स्तर में गिरावट आई है, वहीं ओजोन एक ऐसा प्रदूषक जिसकी चर्चा कम होती है, लेकिन अब अधिक प्रभावी होता जा रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दीर्घकालिक आंकड़ों पर आधारित एक नए सार्वजनिक डैशबोर्ड ने इस चिंताजनक स्थिति को उजागर किया है। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में ओजोन का वार्षिक औसत जो 2021 में 52 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, वह 2025 में बढ़कर 66 हो गया है। इसके अलावा, उन दिनों की संख्या में भी भारी उछाल आया है जब ओजोन मुख्य प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया है।
दिल्ली अभी भी पर्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) की समस्या से पूरी तरह मुक्त नहीं हुई है, विशेष रूप से सर्दियों के दौरान ये सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक रहते हैं। हालांकि, अब प्रदूषण का मिश्रण बदल रहा है। जहां कुछ प्रदूषकों में धीरे-धीरे कमी आ रही है, वहीं ओजोन का उभरना वायु गुणवत्ता की पहेली को और अधिक जटिल बना रहा है।
आमतौर पर ओजोन को वायुमंडल की ऊपरी सुरक्षात्मक परत के रूप में जाना जाता है, लेकिन दिल्ली में बढ़ रहा 'ग्राउंड-लेवल ओजोन' स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सतह के करीब मौजूद यह ओजोन सीधे उत्सर्जित नहीं होता है। यह तब बनता है जब सूरज की रोशनी नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया को तेज करती है।
ओजोन की रासायनिक संरचना इसे धूप और मौसम के प्रति बेहद संवेदनशील बनाती है। यही कारण है कि जहां पर्टिकुलेट मैटर सर्दियों में बढ़ते हैं, वहीं ओजोन का स्तर गर्मियों में, विशेष रूप से मई के महीने में अपने चरम पर होता है। विडंबना यह है कि साफ आसमान और तेज धूप वाले दिन ओजोन के उच्च स्तर के लिए सबसे अनुकूल होते हैं।
Updated on:
06 May 2026 01:45 pm
Published on:
06 May 2026 01:45 pm
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