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National Security Case: देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को हथियार सप्लाई करने और ट्रेनिंग देने के आरोपी 7 विदेशी नागरिकों को 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इनमें एक अमेरिकी और छह यूक्रेन के नागरिक शामिल हैं, जिन पर भारत के खिलाफ साजिश रचने और म्यांमार के रास्ते अवैध गतिविधियों में शामिल होने का संगीन आरोप है।
जांच एजेंसी एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के अनुसार, यूक्रेन के ये नागरिक अलग-अलग तारीखों पर टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आए थे। जांच में सामने आया कि ये पहले गुवाहाटी पहुंचे और वहां से बिना वैध अनुमति के मिजोरम चले गए, जहां से उन्होंने अवैध रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर म्यांमार में प्रवेश किया। एनआईए की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद सोमवार को सभी आरोपियों को विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
अदालत ने अपने आदेश में इन आरोपियों की गतिविधियों को देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि जांच में सामने आया है कि ये विदेशी नागरिक म्यांमार में सक्रिय संगठनों के जरिए भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी समूहों को हथियार और युद्ध सामग्री मुहैया करा रहे थे, साथ ही उन्हें आधुनिक हथियारों और युद्ध कौशल का प्रशिक्षण भी दे रहे थे। कोर्ट ने माना कि यह मामला भारत की अखंडता और राष्ट्रीय हितों से सीधे जुड़ा है, इसलिए इस पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 18 लागू होती है। जिन सात विदेशी नागरिकों को जेल भेजा गया है, उनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिक हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफांकीव मारियन, होनचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं।
इससे पहले 16 मार्च को अदालत ने इन आरोपियों को पूछताछ के लिए 11 दिन की रिमांड पर भेजा था, जिसे बाद में 10 दिन और बढ़ाया गया था। एनआईए अब इस नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन विदेशी नागरिकों के पीछे किन अंतरराष्ट्रीय ताकतों का हाथ है और भारतीय उग्रवादी संगठनों के साथ इनके संपर्क कितने गहरे हैं।
Updated on:
06 Apr 2026 07:00 pm
Published on:
06 Apr 2026 07:00 pm
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