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अखिल भारतीय किडनी रैकेट का पर्दाफाश! 50-80 लाख में सौदा, पीड़ित को मिले सिर्फ 5-8 लाख

Kidney Transplant Racket: महाराष्ट्र पुलिस ने अखिल भारतीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया है। इसकी जड़े तमिलनाडु से जुड़ी हैं। इसके अलावा इस रैकेट का कंबोडिया से अंतरराष्ट्रीय संबंध होने की भी आशंका है।
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नई दिल्ली

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Vishnu Bajpai

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Updated: 1 Jan 2026, 6:00 PM IST

Pan India kidney transplant racket exposed in Maharashtra

महाराष्ट्र में अखिल भारतीय किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह का पर्दाफाश।

Kidney Transplant Racket: पूर्वी महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में मिली एक ‌शिकायत की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। इस खुलासे ने जहां महाराष्ट्र पुलिस को चौंका दिया, वहीं इसकी जड़ें अंतरराष्ट्रीय लेवल तक फैली होने की आशंका को बल भी मिला। महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि यह रैकेट सूदखोरी के बल पर चलाया जा रहा था, जो लोगों को मजबूर करके अपनी किडनी बेचने का दबाव बनाता था। जांच में ये भी सामने आया है कि एक किडनी को 50-80 लाख के बीच में बेचा जाता था, जबकि किडनी दाता तो मात्र 5-8 लाख रुपये देकर टरका दिया जाता था। इस रैकेट की जड़ें तमिलनाडु के एक अस्पताल से भी जुड़ी पाई गई हैं। इसके बाद दो डॉक्टरों के खिलाफ जांच तेज हो गई है।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से शुरू हुई मामले की जांच

महाराष्ट्र पुलिस की मानें तो चंद्रपुर जिले के पशुओं का दूध बेचने वाले किसान ने साहूकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत की जांच के बाद इस बड़े रैकेट का खुलासा हुआ, जिसका कंबोडिया तक अंतरराष्ट्रीय संबंध होने की आशंका है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चंद्रपुर जिला निवासी किसान रोशन कुले ने शिकायत में बताया कि उसने साहूकार से कर्ज लिया था, जो चुकाने में असमर्थ होने पर साहूकार ने उसपर कंबोडिया जाकर अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर किया। शिकायत मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।

पुलिस की जांच में सामने आया बड़ा गैंग

जांच में पता चला कि किडनी की खरीद-फरोख्त में एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबों को अपना निशाना बनाकर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करवाता है। इस मामले में चंद्रपुर के एसपी मुम्मका सुदर्शन ने बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जांच में दो डॉक्टरों की भूमिका सामने आई है। इनमें नई दिल्ली के डॉ. रविंदर पाल सिंह और तमिलनाडु के त्रिची स्थित स्टार किम्स अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. राजारत्नम गोविंदस्वामी शामिल हैं।

एसआईटी को सौंपी गई किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच

पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन ने बताया कि अभी तक जांच में ये दोनों डॉक्टर इस रैकेट के प्रमुख सदस्य माने जा रहे हैं। इनके खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित की गई है। इसके अलावा स्‍थानीय क्राइम ब्रांच को नई दिल्ली और तमिलनाडु के त्रिची भेजा गया है। एसपी का कहना है कि मामले की प्राथमिक जांच में ये भी सामने आया कि यह अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कंबोडिया ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में भी अवैध रूप से किया जा रहा है। इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने संगठन के मुख्य आरोपी रामकृष्‍ण सांचू उर्फ डॉक्टर कृष्‍णा को गिरफ्तार किया था, लेकिन जांच में पता चला कि रामकृष्‍ण डॉक्टर है ही नहीं। वह खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को झांसे में लेता था।

फर्जी डॉक्टर और उसके सहयोगी ने खोली पोल

इसके बाद पुलिस ने फर्जी डॉक्टर रामकृष्‍ण के सहयोगी हिमांशु भारद्वाज को भी हिरासत में लिया। इन दोनों से पूछताछ में पता चला कि ये दोनों पहले खुद किडनी दाता रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पैसों की तंगी के चलते दोनों ने अपने-अपने गुर्दे बेचे था। बाद में खुद इस नेटवर्क का हिस्सा बन गए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि हिमांशु भारद्वाज ने रामकृष्ण से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया था। इसके बाद ही उसे तमिलनाडु के त्रिची स्थित स्टार किम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां कथित तौर पर गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया।

किडनी दाता को मामूली रकद देकर टरकाया

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के इस रैकेट में किडनी खरीदने वालों से 50-80 लाख रुपये तक वसूले जाते थे, लेकिन किडनी बेचने वालों को सिर्फ 5-8 लाख रुपये देकर टरका दिया जाता था। इसके बाद बचे रुपये का नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों में बंटवारा होता था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि तकनीकी विश्लेषण और अन्य सबूतों के आधार पर पुष्टि हुई कि हिमांशु ने आर्थिक मजबूरी में किडनी बेची और इसकी पूरी प्रक्रिया की व्यवस्था रामकृष्ण ने की थी। इसमें अस्पताल में भर्ती, यात्रा और सर्जरी से जुड़े इंतजाम शामिल थे।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद गिरोह में बांटी जाती थी रकम

एसपी सुदर्शन ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि किडनी दाता को 10 प्रतिशत कीमत देने के बाद लगभग 10 लाख रुपये दिल्ली के डॉ. रविंदर पाल सिंह को और करीब 20 लाख रुपये अस्पताल को सर्जरी शुल्क के रूप में दिए जाते थे, जबकि बाकी रकम रामकृष्ण अपने पास रखता था। उन्होंने कहा कि कंबोडिया में चल रहा किडनी रैकेट किसी एक व्यक्ति या समूह तक सीमित नहीं है। जांच में भारतीय डॉक्टरों, अस्पतालों और एजेंटों की संगठित संलिप्तता सामने आई है।

अब अस्पतालों, डॉक्टरों और एजेंटों की जांच शुरू

उन्होंने कहा कि दाताओं, डॉक्टरों, अस्पतालों और एजेंटों के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित किए जा चुके हैं और आगे की जांच में और भी कड़ियां जुड़ सकती हैं। एसपी ने बताया कि इस मामले की जांच में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ईश्वर कटकाडे के नेतृत्व में विशेष जांच दल यानी SIT कर रही है। इसके तहत अब पीड़ितों और उनके साथ मौजूद रहे लोगों के बयान दर्ज किए जाने हैं। बयान के आधार पर यदि अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और संबंध सामने आते हैं तो राज्य और केंद्र सरकार से सहयोग मांगा जाएगा।

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