
AI से बनाया गया प्रतीकात्मक फोटो
Delhi Fire Service response delay: देश की राजधानी में अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग इस कदर हावी हो चुकी है कि आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों का पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है। एक हालिया जमीनी सर्वे (Ground Assessment) में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में 10 मीटर चौड़ी सड़कों पर अवैध कब्जों के बाद मात्र 1.5 से 3.5 मीटर जगह ही आवाजाही के लिए बची है। यह स्थिति दमकल विभाग के मानकों से कहीं नीचे है, जिन्हें सुचारू संचालन के लिए कम से कम 6-7 मीटर चौड़े रास्ते की आवश्यकता होती है।
हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा लेजर डिवाइस से किए गए माप में सामने आया कि दिल्ली की सड़कों की वास्तविक चौड़ाई और उपलब्ध जगह में जमीन-आसमान का अंतर है:-
दिल्ली अग्निशमन सेवा के विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा साझा किए गए तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, एक मानक फायर टेंडर की चौड़ाई लगभग 2.5 मीटर और लंबाई 7 से 9 मीटर के बीच होती है। इतने बड़े वाहन को भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षित रूप से मोड़ने और संचालित करने के लिए कम से कम 4 से 5 मीटर के 'मैनुवरिंग स्पेस' या टर्निंग रेडियस की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, ऊंची इमारतों में बचाव कार्य के लिए उपयोग किए जाने वाले हाइड्रोलिक एरियल प्लेटफॉर्म (स्काईलिफ्ट) को न केवल जमीन पर अधिक जगह चाहिए, बल्कि संचालन के लिए 4 से 4.5 मीटर की ऊर्ध्वाधर निकासी (vertical clearance) की भी जरूरत होती है। वहीं, पालम कॉलोनी में मार्च में लगी आग के दौरान, संकरी गलियों और लटकते तारों की वजह से 'स्काईलिफ्ट प्लेटफॉर्म' का इस्तेमाल नहीं हो सका, जिसके चलते एक ही परिवार के 9 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई।
पूर्व दिल्ली फायर सर्विस प्रमुख अतुल गर्ग ने चेतावनी दी है कि आग लगने के शुरुआती 4-5 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन अतिक्रमण के कारण दमकल कर्मी समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे छोटी आग भी बड़ी त्रासदी का रूप ले लेती है। प्रशासन की 2019 की पार्किंग नीति के बावजूद, जमीन पर प्रवर्तन की कमी दिल्लीवासियों की सुरक्षा पर भारी पड़ रही है।
Published on:
11 May 2026 01:33 pm
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