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6 मीटर की सड़क पर 3 मीटर का कब्जा: दिल्ली की गलियों में दम तोड़ती सुरक्षा, दमकल विभाग के लिए ‘नो-एंट्री’ जैसे हालात

Delhi residential parking crisis: दिल्ली के रिहायशी इलाकों में बढ़ते अतिक्रमण और अनियंत्रित पार्किंग ने दमकल सेवाओं के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर 10 मीटर चौड़ी सड़कें सिमटकर मात्र 3 मीटर रह गई हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ियां घटनास्थल तक समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं

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Delhi Fire Service

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक फोटो

Delhi Fire Service response delay: देश की राजधानी में अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग इस कदर हावी हो चुकी है कि आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों का पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है। एक हालिया जमीनी सर्वे (Ground Assessment) में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में 10 मीटर चौड़ी सड़कों पर अवैध कब्जों के बाद मात्र 1.5 से 3.5 मीटर जगह ही आवाजाही के लिए बची है। यह स्थिति दमकल विभाग के मानकों से कहीं नीचे है, जिन्हें सुचारू संचालन के लिए कम से कम 6-7 मीटर चौड़े रास्ते की आवश्यकता होती है।

कागजों पर सड़क चौड़ी, हकीकत में संकरी

हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा लेजर डिवाइस से किए गए माप में सामने आया कि दिल्ली की सड़कों की वास्तविक चौड़ाई और उपलब्ध जगह में जमीन-आसमान का अंतर है:-

  • पालम कॉलोनी: यहां मुख्य एप्रोच रोड की चौड़ाई 10.23 मीटर है, लेकिन पार्किंग के कारण केवल 3.60 मीटर हिस्सा ही उपयोग के लिए खुला है।
  • राजौरी गार्डन: 7.8 मीटर चौड़ी सड़क का आधे से ज्यादा हिस्सा (4.8 मीटर) कारों की पार्किंग की भेंट चढ़ चुका है।
  • लक्ष्मी नगर: यहां स्थिति सबसे बदतर है; 3.66 मीटर चौड़ी सड़क पर सीढ़ियों और ठेलों के अतिक्रमण के बाद मात्र 1.83 मीटर रास्ता बचा है, जहाँ से कचरा ढोने वाली गाड़ी का निकलना भी दूभर है।
  • सी.आर. पार्क और जीके: पॉश कॉलोनियों में भी 4.98 मीटर की सड़क पार्किंग के चलते घटकर 2.73 मीटर रह गई है।

कीमती समय और जान का नुकसान

दिल्ली अग्निशमन सेवा के विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा साझा किए गए तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, एक मानक फायर टेंडर की चौड़ाई लगभग 2.5 मीटर और लंबाई 7 से 9 मीटर के बीच होती है। इतने बड़े वाहन को भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षित रूप से मोड़ने और संचालित करने के लिए कम से कम 4 से 5 मीटर के 'मैनुवरिंग स्पेस' या टर्निंग रेडियस की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, ऊंची इमारतों में बचाव कार्य के लिए उपयोग किए जाने वाले हाइड्रोलिक एरियल प्लेटफॉर्म (स्काईलिफ्ट) को न केवल जमीन पर अधिक जगह चाहिए, बल्कि संचालन के लिए 4 से 4.5 मीटर की ऊर्ध्वाधर निकासी (vertical clearance) की भी जरूरत होती है। वहीं, पालम कॉलोनी में मार्च में लगी आग के दौरान, संकरी गलियों और लटकते तारों की वजह से 'स्काईलिफ्ट प्लेटफॉर्म' का इस्तेमाल नहीं हो सका, जिसके चलते एक ही परिवार के 9 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई।

पूर्व दिल्ली फायर सर्विस प्रमुख अतुल गर्ग ने चेतावनी दी है कि आग लगने के शुरुआती 4-5 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन अतिक्रमण के कारण दमकल कर्मी समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे छोटी आग भी बड़ी त्रासदी का रूप ले लेती है। प्रशासन की 2019 की पार्किंग नीति के बावजूद, जमीन पर प्रवर्तन की कमी दिल्लीवासियों की सुरक्षा पर भारी पड़ रही है।